फोटो- 18 जमुई- 5

संवाद सहयोगी, जमुई : महाअष्टमी पर्व को लेकर भक्त कृष्णभक्ति में सराबोर पूजा की तैयारी में जोरशोर से लगे हैं। नगर के पुरानी बाजार स्थित श्रीश्याम रानी सती मंदिर सहित अन्य मंदिरों में कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर तैयारी जोरों पर है। श्रीश्याम रानी सती मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष संजय बालोदिया ने बताया कि कान्हा के जन्म उत्सव को मनाने के लिए हर कोई उत्साहित है। पिछले दो वर्षों से विशेष जन्मोत्सव कार्यक्रम नहीं हो पाया था। इस वर्ष मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे बैलून, मोर पंख एवं आकर्षक फूलों से सजाया जा रहा है। संध्या के समय भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया है तथा मध्य रात्रि को कान्हा के जन्म समय के उपरांत केक काटकर जन्मोत्सव मनाया जाएगा तथा महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। नगर के कई घरों की महिलाएं मुरली-मनोहर को सजाने-संवारने एवं भोग लगाने के लिए पकवान बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सुबह से बाजारों से भीड़ देखी गई।

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लड्डू से सजी दुकानें, बाजारों में बढ़ी रौनक

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है। नगर के महाराजगंज बाजार, पुरानी बाजार, कचहरी चौक रोड बाजार, बोधवन तालाब रोड बाजार सहित अन्य बाजार व दुकानों पर बाल गोपाल की मिट्टी से लेकर पीतल, अष्ट धातु, सोने, चांदी तक की मूर्तियां बिक रही हैं। जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की झांकी सजाने के लिए कृष्ण भक्तों में खिलौनों की बहुत मांग है। दुकानदार अंशु कुमार, प्रमोद केशरी सहित अन्य दुकानदारों ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर सभी तरह की सामग्री उपलब्ध है, जैसे लड्डू गोपाल के लिए लकड़ी का झूला, पोशाक, बांसुरी, घुंघुराले बाल, शीशा, जूती, पालना, लाइटिग, गुब्बारे, सिंहासन, चारपाई, नग से सजा चश्मा, माखन मटकी, लाइट झालर, मोर पंख, कालिया नाग व अन्य खिलौने हैं। इनमें बांसुरी बजाते, पालना में बैठे, माखन खाते कृष्ण की बालरूप मूर्तियां भी शामिल है।

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बाजारों में कीमतें प्रति पीस झूला लकड़ी- 100 से 500 रुपये पीस

झूला पीतल- 200 से 8000

खिलौना (सेट)- 250-700

लकड़ी का हाथी (सेट): 200 से 500

पालना स्पेशल- 250 से 1000

परिधान- 100 से 500 रुपये

जड़ी मुकुट- 50-200 रुपये

पगड़ी- 20 से 250 रुपये

बाल गोपाल मूर्ति- 200 से 1000 रुपये

मटकी- 50 से 250 रुपये

मोर पंख- 10 से 20 रुपये

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कहते हैं आचार्य

जन्माष्टमी व्रत को लेकर इस वर्ष अलग-अलग मत चल रहे हैं। पंडित मनोहर आचार्य, आचार्य ललन झा, आचार्य मनोज पांडे, आचार्य शिरोमणि ने बताया कि पहले गृहस्थ और साधु-संत अलग-अलग दिन जन्माष्टमी मनाते थे। इस वर्ष ऐसा नहीं है। इस वर्ष गृहस्थ और वैष्णव एक साथ 19 अगस्त शुक्रवार को ही कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करेंगे। पंचांग के अनुसार 18 अगस्त गुरुवार को सप्तमी होने के कारण व्रत करना शुभ नहीं माना गया है। इस बार 19 अगस्त (शुक्रवार) को दो साल बाद जन्माष्टमी कृतिका नक्षत्र में मनाया जाएगा। इस जन्माष्टमी पर ध्रुव योग के साथ जयद योग का युग्म संयोग बन रहा है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण पक्ष अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था लेकिन इस बार 19 अगस्त (शुक्रवार) को दो साल बाद जन्माष्टमी कृतिका नक्षत्र में मनाया जाएगा। रोहिणी नक्षत्र का संबंध जहां चंद्रमा से होता है। कृतिका नक्षत्र का संबंध सूर्य से होता है जो शासन-सत्ता से जुड़ा होता है।

Edited By: Jagran

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