जमुई। मोहर्रम, रामनवमी, चैती दशहरा और छठ पर्व प्रभावित होने के बाद सोमवार को ईद-उल-फितर भी सादगी से मनाई जाएगी। संक्रमण का असर यह की न ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज की भीड़ होगी और न ही लोग एक दूसरे से गले मिल ईद मुबारक कह सकेंगे। हाथ मिलाने में भी संक्रमण का खतरा है, लिहाजा दूर से ही ईद मुबारक की रस्म होगी। साथ ही एक दूसरे को सेवई और लच्छी खाने-खिलाने के दौर पर भी लगभग विराम सा होगा।

जिला प्रशासन का आदेश और अपील के साथ मस्जिद के मौलाना और समाज के बुद्धिजीवियों ने भी मौके की नजाकत समझते हुए लोगों से घरों में ही रहकर नमाज अदा करने की गुजारिश की है। कुल मिलाकर यह कहें कि मुसलमान भाइयों का 2020 का यह ईद का त्योहार कई मायने में याद रखा जाएगा। संक्रमण काल में लॉकडाउन का असर पहले भी रमजान के दौरान रोजा को लेकर बाजारों में भीड़ से परहेज के रूप में देखा जा चुका है। त्योहार को लेकर भी खरीदारी के लिए होने वाली विशेष गहमागहमी भी इस दफे कम ही दिखी। ईद-उल-फितर के मौके पर शहर के कई मस्जिदों के अलावा इस्लाम नगर मोहल्ले में अवस्थित ईदगाह मैदान में नमाज के लिए हजारों की भीड़ इकट्ठा होती थी।

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कोट

संक्रमण के खतरे और लॉकडाउन-4 के अनुपालन को लेकर विशेष तौर पर हिदायत दी गई है। ईद-उल-फितर की विशेष नमाज मस्जिदों और ईदगाहों में प्रतिबंधित होगा। लोग एक दूसरे के गले नहीं मिल सकेंगे। साथ ही अनावश्यक भीड़ लगाने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. इनामुल हक मेंगनू, पुलिस अधीक्षक, जमुई।

Posted By: Jagran

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