जमुई में NH-333A भूमि अधिग्रहण विवाद में मिली बड़ी राहत, हजारों एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटी
जमुई में NH-333A के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण पर लगी रोक हटा ली गई है, जिससे हजारों एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री संभव हो सकेगी।

हजारों एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटी
HighLights
NH-333A भूमि अधिग्रहण पर लगी रोक हटाई गई, मिली बड़ी राहत।
जमुई में हजारों एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री अब हो सकेगी।
दैनिक जागरण की खबर के बाद प्रशासन ने यह निर्णय लिया।
संवाद सहयोगी, जमुई। एनएच-333ए के चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण के नाम पर हजारों एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक आखिरकार हटा ली गई। दैनिक जागरण ने 3256 रैयतों के 5197 प्लाट पर लगी रोक से उत्पन्न परेशानी को प्रमुखता से उठाया था।
खबर का असर हुआ और जिला प्रशासन ने अधिग्रहित होने वाली भूमि को छोड़कर शेष जमीन के निबंधन की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इसके आलोक में अवर निबंधन जमुई और चकाई को आदेश भी जारी कर दिया गया है। अब सिर्फ उतनी ही भूमि पर रोक रहेगी, जितनी एनएच-333ए के लिए वास्तव में अधिग्रहित की जानी है।
डीएम द्वारा जारी पत्र के अनुसार अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एनएच-333ए के निर्माण एवं चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित होने वाली भूमि को छोड़कर शेष भूमि को निबंधन पर लगी रोक की सूची से हटा दिया जाए।
समाहर्ता ने जिला अवर निबंधक, जमुई एवं चकाई को समिति के निर्णय के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
5000 एकड़ से अधिक जमीन पर थी रोक
एनएच-333ए के जमुई जिले में करीब 68 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण के लिए 255.77 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें 96 हेक्टेयर सरकारी और 159.77 हेक्टेयर रैयती भूमि शामिल है। रैयती भूमि के लिए 3256 रैयतों के 5197 प्लाट चिह्नित किए गए हैं।

अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान पूरे खेसरा पर रोक लगाए जाने से अधिग्रहण क्षेत्र से बाहर की जमीन भी इसकी जद में आ गई थी। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा था, जिन्हें जमीन बेचकर शादी-विवाह, इलाज, बच्चों की पढ़ाई अथवा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए राशि की जरूरत थी। निबंधन नहीं होने के कारण कई लोग अंचल से जिला स्तर तक अनुमति के लिए चक्कर लगाने को मजबूर थे।
दैनिक जागरण ने उठाया था मामला
जागरण ने अपनी खबर में यह मामला उठाया था कि सिकंदरा-जमुई मार्ग पर महज तीन डिसमिल जमीन के अधिग्रहण के विरुद्ध एक एकड़ के प्लाट के निबंधन पर रोक लगा दी गई थी। इससे वास्तविक अधिग्रहण क्षेत्र की तुलना में कई गुना अधिक भूमि प्रभावित हो रही थी। प्रशासन के ताजा निर्णय से ऐसे मामलों में लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी
राजस्व विभाग की सचिव जय सिंह ने 28 जुलाई को ही अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के अतिरिक्त संबंधित खेसरा की जमीन पर लगी रोक को गलत ठहराते हुए उसे हटा लेने का आदेश प्रदेश भर के जिला पदाधिकारियों को दिया था।
यह दीगर बात है कि सचिव के आदेश को धरातल पर उतारने के लिए जागरण को मुद्दा उठाना पड़ा। इसके बाद ही सचिव के आदेश पर अमल की मोहर लगी। शायद इस महत्वपूर्ण आदेश को जिला पदाधिकारी की नजरों से ओझल कर दिया गया था!
अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में आयोजित समिति की बैठक में अधिग्रहण के लिए चिन्हित भूमि के अतिरिक्त जमीन पर संव्यवहार की लगी रोक हटा ली गई है। उक्त आशय का निर्देश जमुई एवं चकाई के अवर निबंधक को दे दिया गया है। - नवीन, डीएम, जमुई।
