जमुई। यूनियन बैंक की जमुई शाखा में पीएमईजीपी स्कीम के तहत बांटे गए ऋण में बड़ा घोटाला सामने आया है। वहां के सेकंड मैन रहे अनुपम कुमार ने शाखा प्रबंधक का प्रभार मिलते ही एक माह में धड़ाधड़ 85 लोगों को 4.34 करोड़ का लोन दे दिया। उक्त कारनामे की भनक मिलते ही हेडक्वार्टर में सनसनी फैल गई। ब्रांच की इंटरनल अंकेक्षण कराई तो राज से पर्दा उठ गया।

आडिट टीम ने पाया कि रीजनल मैनेजर ने जिसे ब्रांच हेड की जिम्मेदारी दी थी, वह पहले से दागी रहा है। अनुपम को एचआर ने 29 अप्रैल 2020 को मेमो थमाया था कि विभागीय आडिट ने उनके कामकाज को लेकर 9 मार्च 2020 को रिपोर्ट की है। इसमें उन्हें इंक्वायरी सेल के इंचार्ज को शोकॉज का जवाब देना था। फिलहाल अनुपम की सेवा यूनियन बैंक के भागलपुर में है इसके पहले उसे अलीनगर शाखा प्रबंधक पद से उपकृत किया गया था। इस पूरे प्रकरण में बैंक प्रबंधन के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आरएम को अनुपम के मेमो के बारे में पता था फिर किन परिस्थितियों में उसे शाखा प्रबंधक का प्रभार दिया गया। उसे तत्कालीन शाखा प्रबंधक जयकी कुमार देव के कोविड से ग्रस्ति होने के बाद 13 अक्टूबर 2020 से लेकर 13 नवंबर 20 तक प्रभार दिया गया था। इस पूरे मामले में उद्योग विभाग भी कठघरे में है। आखिर किस परिस्थिति में एक ही परिवार के कई लोगों का आवेदन स्वीकृत कर लोन के लिए अग्रसारित किया गया। बड़ी बात यह भी है कि आरएम अशोक उपाध्याय ने दो दर्जन लोगों को शिविर लगाकर स्वीकृति पत्र दिया था।

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इन तीन लोन के लिए मांगी थी अनुमति और 85 को बांटी रेवड़ियां

ब्रांच हेड अनुपम कुमार ने 8 जुलाई 2020 को आरएम को ईमेल कर न्यू भारत प्रिटिग प्रेस, त्रिपुरारि इंजीनियरिग वर्कशॉप गेट एंड ग्रिल निर्माण और पूनम ठाकुर को लोन देने के लिए अनुमति मांगी थी। इसके बाद ही उसने 85 लोगों को लोन बांट दी। नियम के मुताबिक 10 लाख से ऊपर के लोन के लिए सिविल एमएसएमई रैंक रिपोर्ट बनना जरूरी है।

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आडिट रिपोर्ट की आपत्तियां

1. मे. सुनील बसंत विहार के मालिक सुनील कुमार यादव को 20 लाख और उनकी पत्नी गुड़िया देवी को फर्म सुनील नमकीन एंड बेकरी उद्योग को 18 लाख का लोन पीएमईजीपी स्कीम से दिया गया। आडिट टीम को दुकान मे. स्टॉक महज 5 लाख भी नहीं मिला। खाते की जांच मे. विपत्र भी फर्जी पाया गया। बिल दयाल ट्रेडर्स का दिखाया, जबकि पैसा चंदन आयरन स्टील एंड फर्नीचर के खाते मे. हस्तांतरित हुआ।

2. दो लाख के स्टॉक वाले एके इंटरप्राइजेज को 20 लाख का लोन दिया गया। इतना ही नहीं इसके परिवार के छह सदस्यों को 91 लाख का लोन दिया गया। उमाशंकर स्वर्णकार को 10 लाख के अलावे उनके पांच बेटों क्रमश: चंदन को 21 लाख, अनिल स्वर्णकार, अभिनंदन कुमार, त्रिलोकीनाथ व मनमहेश कुमार को 20-20 लाख का लोन दिया गया।

3. त्रिलोकीनाथ के फर्म काजल फर्नीचर हाउस को 20 लाख का लोन दिया गया। उस पर 1.80 लाख का लोन था और 7100 रुपए ओवरड्यू था। बावजूद उसे लोन दिया गया।

4. राजेश कुमार स्वर्णकार और उसके भाई शिव प्रकाश स्वर्णकार को 20-20 लाख का लोन दिया गया। राजेश का न्यू प्रकाश स्टील नामक बगैर रजिस्टर्ड फर्म है। इसे लोन नहीं दिया जा सकता है। फिर भी अनुपम ने दिया। शिव फर्नीचर हाउस नामक दुकान के मालिक शिव प्रकाश स्वर्णकार हैं। शिव के बगैर रजिस्टर्ड फर्म को भी लोन दिया गया।

5 . कृतिका इंटरप्राइजेज का टर्म लोन 3.75 लाख और सीसी लिमिट 20 लाख का है लेकिन अनुपम ने बिना केवीआईसी के अप्रूवल के पीएमईजीपी लोन किया जबकि बैंकिग गाइडलाइन के मुताबिक पीएमईजीपी लोन प्रोजेक्ट रिपोर्ट का 40 प्रतिशत तक ही दिया जाना था।

6. मुस्कान इंटरप्राइजेज के अरविद मंडल को फर्म व व्यक्तिगत रूप से 30 लाख का लोन दिया गया। उनके सगे भाई रविद्र कुमार मंडल को 7.60 लाख का लोन दिया गया।

7 . ओम ट्रेडर्स की मालकिन पुनिता सिंह को लोन लिमिट 10 लाख से 20 लाख किया और उनके पति नीरज कुमार सिंह को भी 10 लाख से 20 लाख किया। नियमत: एक ही परिवार के सदस्यों को पीएमईजीपी का लाभ नहीं देना था।

8. श्री हीरा इंटरप्राइजेज, सौरव कुमार, आरपी टेलीकॉम, अमलेश कुमार यादव, अमित इंटरप्राइजेज, सतीश कुमार और अमजद अहमद को भी लोन बगैर सिविल एमएसएमई रैंक रिपोर्ट चेक किए ही अप्रूव किए गए जबकि इनमें कई पुराने लोनी थे और दागदार रहे थे।

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स्वीच आफ आ रहा मोबाइल

तत्कालीन शाखा प्रबंधक जैकी कुमार देव का मोबाइल स्वीच आफ बता रहा है जबकि शाखा प्रबंधक कृष्णदेव को मोबाइल कवरेज एरिया से बाहर है।

Edited By: Jagran