विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जमुई में खैरा-गरही मार्ग का ललदैया पुल क्षतिग्रस्त, ग्रामीण 10 KM का चक्कर लगाने को मजबूर; हजारों लोग परेशान

Published: Tue, 25 Aug 2026 05:27 PM (GMT+05:30)

खैरा-गरही मुख्य मार्ग पर स्थित ललदैया काजवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों का सीधा ...और पढ़ें

संवाद सूत्र, खैरा (जमुई)। खैरा-गरही मुख्य मार्ग पर दक्षिणी क्षेत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ललदैया काजवे पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से दक्षिणी क्षेत्र के कई गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है।

हजारों ग्रामीणों के लिए आवागमन की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले इस पुल से यातायात बाधित होने के बाद लोगों को दूसरे रास्ते से पांच-छह किलोमीटर से लेकर करीब 10 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

79325247

बता दें कि गिद्धेश्वर और पूर्वतार के बीच स्थित इस पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, किसान और नौकरी-पेशा लोग आवागमन करते थे। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को हो रही है।

जानकारी के अनुसार, 11 दिसंबर 2004 को जल संसाधन विभाग द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी में पुल का उद्घाटन किया गया था।

करीब 344 लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण कराया गया था। लंबे समय से पुल की स्थिति जर्जर बनी हुई थी। पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक भी लगाई गई थी, इसके बावजूद अब पुल के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन का संकट और गहरा गया है।

79325246

नए पुल का निर्माण अधूरा

पुराने पुल के बगल में नए पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन इसके पूरा नहीं होने के कारण अब तक लोग पुराने पुल से ही आवागमन कर रहे थे। पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद दक्षिणी क्षेत्र के लोगों के सामने गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था कराने और नए पुल का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की है। इधर, पुल क्षतिग्रस्त होने के साथ ही इसका एक पाया भी धंस गया है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आवागमन के दौरान एक बाइक नदी में फंस गई। हालांकि, बाइक सवार सुरक्षित बच गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की स्थिति लगातार खतरनाक बनी हुई है।

2012 में भी हुआ था पुल को नुकसान पहुंचाने का प्रयास

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2012 में माओवादियों ने इस पुल को डायनामाइट से उड़ाने का प्रयास किया था। विस्फोट में पुल के दो पायों में हल्की दरार आई थी। इसके बाद से ही पुल की स्थिति को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई थी। अब पुल के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र के लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।