कैंसर ने मां को छीना; फिर भी नहीं हारी हिम्मत, जमुई की करीना बनी 'नर्स बिटिया'
कैंसर से मां को खोने के बावजूद जमुई की करीना मर्मू ने नर्स बनने का अपना सपना पूरा किया। वह ...और पढ़ें

कैंसर ने मां को छीना; फिर भी नहीं हारी हिम्मत, जमुई की करीना बनी 'नर्स बिटिया'

समय कम है?
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संवाद सहयोगी, जमुई। कैंसर ने तो उसके सिर से दो वर्ष पूर्व मां का साया छीन लिया, लेकिन इसके बाद भी उसका हौसला नहीं टूटा और मजबूत इरादों के बल पर उसने नर्स बनने के अपने सपने को साकार कर लिया।
जी हां, यह संघर्ष से भरी हुई एक सच्ची कहानी है, लक्ष्मीपुर प्रखंड के अदवरिया निवासी टेलर मुर्मू और स्व. झानो देवी की पुत्री करीना मर्मू की।
करीना बताती है कि बचपन से ही मेरी ख्वाहिश नर्स बनकर समाज के गरीब तबके के लोगों की सेवा करने की थी। इस मुहिम को पूरा करने के लिए मैंने अपने गांव स्थित मध्य विद्यालय में आठवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2020 में राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, लक्ष्मीपुर में नवमी कक्षा में नामांकन करवाया।
करारी ने कहा, मैंने प्रत्येक दिन साइकिल से सात किलोमीटर की दूरी तय करके वर्ष 2023 में मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास किया। इसी दौरान 26 मई 2024 को मेरी मां की असमायिक मौत कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से हो गई।
करीना को लगा सदमा, अंदर से टूटी
इस घटना से करीना को बहुत बड़ा सदमा लगा और वो अंदर से टूट गई, लेकिन फिर किसी तरह हिम्मत करके वर्ष 2025 में साइंस से इंटर का परीक्षा दिया और प्रथम श्रेणी से पास हुई।
'आसपास के लोगों ने उड़ाया मजाक'
उसने बताया कि मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी करने में मुझे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान गांव और आसपास के लोगों ने मेरा बहुत मजाक उड़ाया, लेकिन मेरे माता-पिता ने हर हमेशा पढ़ाई जारी रखने और उसे पूरा करने के लिए मेरा हौसला बढ़ाने का काम किया, जिसकी बदौलत इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद एएनएम कॉलेज, मधुबनी में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के लिए दाखिला लिया।
करीना ने आगे बताया कि वर्तमान समय में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हूं और अपने गांव समेत दस किलोमीटर दूर तक स्थित आधा दर्जन गांवों का नि:शुल्क इलाज करने का काम कर रही हूं। लक्ष्मीपुर प्रखंड क्षेत्र से आदिवासी समाज से मैं पहली महिला नर्स हूं।
बकौल करीना, अपने जीवन में किसी भी लक्ष्य को मेहनत, ईमानदारी और सच्ची लगन के बल पर ही हासिल किया जा सकता है। पूरे इलाके के लोग उसे 'नर्स बिटिया' के नाम से भी पुकारते हैं। उसने बताया कि सफलता किसी शार्टकट तरीके से नहीं मिलती है, यह सतत प्रयास से ही हासिल होती है।
