विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही' लगता है डर; जमुई में 'बैड टच' की घटना के बाद छात्राओं की बढ़ी च‍िंता

Published: Fri, 25 Sep 2026 07:14 PM (IST)

Women Safety Ground Report: जमुई में मड़वा पहाड़ घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं, जहाँ उन्हें ...और पढ़ें

छात्राओं ने कहा- सुरक्षा पर ध्‍यान दे सरकार व प्रशासन। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

छात्राओं ने कहा- सुरक्षा पर ध्‍यान दे सरकार व प्रशासन। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

HighLights

  1. मड़वा पहाड़ घटना ने जमुई में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए।

  2. सार्वजनिक वाहनों में महिलाओं को छेड़छाड़ और 'बैड टच' का सामना।

  3. महिलाएं पुलिस गश्त और मनचलों पर सख्त कार्रवाई की मांग करती हैं।

संवाद सहयोगी, जमुई। Women Safety Ground Report: 19 सितंबर की शाम मड़वा पहाड़ पर नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और वीडियो वायरल प्रकरण ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में महिला सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। पुलिस ने मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपितों को जेल की सलाखों के पीछे तो भेज दिया है, लेकिन इस घटना ने उस बुनियादी सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है- 'घर की दहलीज लांघने वाली हमारी बेटियां और महिलाएं आखिर कितनी महफूज हैं?'

सच्चाई यह है कि घटना भले ही मड़वा पहाड़ के एक सुनसान कोने में घटी हो, लेकिन इससे जुड़े खौफ के तार हर उस महिला से जुड़े हैं जो रोज स्कूल, कॉलेज, कोचिंग या दफ्तर के लिए घर से निकलती हैं। सड़क पर मनचलों की अश्लील फब्तियां, वाहनों में घूरती निगाहें, पीछा किए जाने की दहशत और भीड़भाड़ में अनचाहा स्पर्श (बैड टच)- यह वह कड़वी हकीकत है जिसे आधी आबादी रोज घूंट-घूंट पीकर सफर करने को मजबूर है।

जमुई में 'सफर और सुरक्षा'

  • पड़ताल का केंद्र: महिसौढ़ी बस स्टैंड, कचहरी चौक, बोधवन तालाब चौक (जमुई)।

  • मुख्य समस्या: घूरती निगाहें, अश्लील गाने, शीशे से ताक-झांक, भीड़ में अनचाहा स्पर्श (Bad Touch) और फब्तियां।

  • असुरक्षित माध्यम: लोकल बसें, शेयरिंग ऑटो और पैसेंजर/लोकल ट्रेनें।

  • मौन रहने की मजबूरी: सामाजिक झिझक, लोक-लाज और विरोध करने पर विवाद बढ़ने की आशंका।

  • महिलाओं की सीधी अपेक्षा: संवेदनशील जगहों पर पुलिस गश्त, सार्वजनिक वाहनों में निगरानी और मनचलों पर तत्काल कानूनी नकेल।

शुक्रवार को संवाददाता ने जमुई के प्रमुख चौराहों और बस पड़ावों पर जाकर दैनिक यात्रा करने वाली महिलाओं से बात की। बातचीत में किसी महिला ने वीआईपी सुविधा की मांग नहीं की; उनकी बस एक ही गुहार है—'घर से निकलने से लेकर वापस लौटने तक उन्हें डर, असहजता और अपमान के साए में न जीना पड़े।'

"भीड़ का फायदा उठाकर गलत छूने की ताक में रहते हैं लोग"

महिसौढ़ी बस स्टैंड पर अलीगंज से बस से उतरकर आ रहीं मालती देवी से जब महिला सुरक्षा पर बात हुई, तो उनका दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा, "बस में चढ़ते ही कई लोगों की घूरती निगाहें असहज कर देती हैं। सीट पर बैठें या खड़े रहें, कई मनचले जानबूझकर पास आकर खड़े होते हैं और फब्तियां कसते हैं। सबसे ज्यादा डर भीड़ का फायदा उठाकर किए जाने वाले अनचाहे स्पर्श (बैड टच) का रहता है। विरोध करो तो कई बार सह-यात्री भी चुप रहते हैं। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि बस में बिना किसी शर्मिंदगी और खौफ के सफर कर सकें।"

"ऑटो चालक शीशे से घूरते हैं, तेज आवाज में बजते हैं फूहड़ गाने"

कचहरी चौक पर इंटरमीडिएट की छात्रा अंजली से मुलाकात हुई। अंजली रोज जमुई रेलवे स्टेशन से ऑटो पकड़कर कोचिंग करने शहर आती है। अंजली ने बताया कि स्टेशन से कचहरी चौक के बीच ऑटो में बैठना किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं होता। चालक कानफाड़ू आवाज में अश्लील और द्विअर्थी गाने बजाते हैं।

चालक बार-बार रियर व्यू मिरर (शीशे) से छात्राओं को घूरते हैं। कई सहेलियों ने भी इस रूट के ऑटो चालकों की इस तरह की फूहड़ हरकतों और कमेंटबाजी की शिकायत की है, लेकिन समय पर कोचिंग पहुंचने की मजबूरी में उन्हें यह सब बर्दाश्त करना पड़ता है।

"ट्रेन में भीड़ का फायदा उठाते हैं मनचले, लोक-लाज में घुटती हैं आवाजें"

बोधवन तालाब चौक पर खैरा प्रखंड के एक विद्यालय में पदस्थापित बीपीएससी शिक्षिका मिलीं। शुक्रवार को अवकाश के चलते वे अपने गृह जिले जसीडीह जा रही थीं। उन्होंने बताया कि वे रोजाना ट्रेन से सफर कर जमुई स्टेशन पहुंचती हैं। ट्रेन में पैसेंजर बोगियों की भारी भीड़ का फायदा उठाकर मनचले अश्लील हरकतें और गलत स्पर्श करते हैं।

शिक्षिका ने भावुक होते हुए कहा, "हम पढ़ी-लिखी होकर भी कई बार सामाजिक लोक-लाज और बदनामी के डर से विरोध नहीं जता पातीं। अगर कोई बोले भी तो लोग उल्टा महिला पर ही सवाल उठाने लगते हैं।"

सिर्फ कानून नहीं, समाज की संवेदनशीलता और पुलिसिया चौकसी की दरकार

मड़वा पहाड़ कांड के बाद जमुई की सड़कों पर पसरा यह अघोषित खौफ साफ बताता है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा फासला है। महिलाओं का कहना है कि प्रशासन को सिर्फ बड़ी वारदातों के बाद जागने के बजाय बस स्टैंडों, कोचिंग हब, स्टेशन रोड और ऑटो स्टैंडों पर सादे लिबास में महिला पुलिस बल (एंटी-रोमियो स्क्वॉड) की तैनाती करनी चाहिए।

इसके अलावा सार्वजनिक यात्री वाहनों में चालक-परिचालक का सत्यापन और अश्लील गाने बजाने पर पूर्ण रोक लगनी चाहिए, ताकि बेटियां बिना किसी झिझक और खौफ के अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।

यह भी पढ़ें- जमुई की 6 नदियों पर जंगली कांसिया घास का कब्जा! पाताल तक सूख रहा पानी, 1300 एकड़ खेती चौपट होने से किसान बेहाल