तालाब में कमर तक पानी, ऐप में चल रही खुदाई; जमुई में 'वीबी-जी रामजी' योजना में बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़
जमुई में मनरेगा की वीबी-जी रामजी योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है, जहाँ तालाबों में पानी ...और पढ़ें

तालाब में भरा पानी। फोटो जागरण
HighLights
जमुई में मनरेगा की वीबी-जी रामजी योजना में भ्रष्टाचार उजागर।
पानी भरे तालाबों में भी NMMS ऐप पर खुदाई का काम जारी।
अधिकारियों, अभियंताओं और बिचौलियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा।
अरविंद कुमार सिंह, जमुई। मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के ख्याल से ही विकसित भारत-जी रामजी को लाया गया। इसमें कामगारों को 125 दिन रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ पंचायतों में परिसंपत्ति निर्माण को प्राथमिकता दी गई।
इसी रोजगार की अवधि को पूरा करने के उद्देश्य से बरसात में मिट्टी कार्य करने की पाबंदी वीबी-जी रामजी में नहीं लगाई गई। यहीं मनरेगा में लूट की आदत पाले अधिकारियों, अभियंताओं और बिचौलियों की गठजोड़ को बड़ा अवसर हाथ लग गया।
आलम यह हुआ कि लबालब आहर और तालाब में वीबी-जी रामजी की योजनाएं डुबकी लगाने लगी। यह कैसे संभव हो रहा है, यह जानना है तो जमुई आ जाइए।
यहां संचालित लगभग 600 से अधिक योजनाओं में से 10-05 योजनाओं को ही देख लेने मात्र से स्वतः अंदाजा लग जाएगा। यह दीगर बात है कि यह सब अधिकारियों व अभियंताओं को नहीं दिख रहा है।
क्यों नहीं दिख रहा है, यह अलग सवाल है। पहले भी मनरेगा में साइबर कैफे, दुकान और मकान पर तालाब खोदने जैसे कारनामे होते रहे। बहरहाल, जागरण की पड़ताल में जो तथ्य सामने आया है, वह न सिर्फ हैरान करने वाला, बल्कि पूरी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान भी है।
हालांकि, डीडीसी के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी शिप्रा विजय कुमार चौधरी से आम लोगों को उम्मीद है, लेकिन अधिकारी और अभियंता भयभीत नहीं! आखिर तभी तो इस महत्वाकांक्षी योजना में ऐसा दुस्साहस!
तालाब में पानी, एनएमएमएस एप पर खोदाई
जागरण प्रतिनिधि मंगलवार को झाझा प्रखंड अंतर्गत धमना पंचायत की दिघरा गांव स्थित डुमरिया जोर के बगल में तालाब खोदाई कार्य का जायजा लेने पहुंचे। यहां मास्टर रोल के हिसाब से (एनएमएमएस ऐप में) मंगलवार को 58 मजदूर काम कर रहे थे। धरातल पर तालाब में लबालब पानी और मजदूर एक भी नहीं। आसपास पूछने पर बताया गया कि यहां दो तालाब है। दोनों में पानी भरा है। ऐसे में काम कहां हो रहा है, उन्हें पता नहीं।
इसी प्रकार चकाई प्रखंड अंतर्गत चकाई प्रखंड मुख्यालय की पंचायत में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। चकाई पंचायत की हरियंडीह गांव स्थित सिंह तालाब में भी एनएमएमएस एप पर 48 मजदूर मिट्टी निकालने का काम कर रहे थे, लेकिन तालाब में कमर भर पानी भरा है। लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत दिग्घी पंचायत की भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी।
पंचायत की कमलू गांव में हीरा जोर के समीप तालाब निर्माण कार्य में विगत दो सप्ताह से प्रतिदिन ढाई दर्जन मजदूर एनएमएमएस ऐप पर 14 सितंबर तक काम करते दिख रहे हैं। स्थल पर स्थिति यह है कि लगभग पांच फीट पानी तालाब में जमा है।
खैरा प्रखंड अंतर्गत झुंडो पंचायत में भी योजना सं. डब्लूसी-20801633, 20800757, 20799873 तथा 21434310 की भी स्थिति कमोबेश वैसी ही है। यह सब बानगी भर है। जिले के प्राय: सभी प्रखंडों में चार से छह पंचायतें ऐसी है, जहां ऐसे कारनामे हो रहे हैं।
अब पानी भरे आहर और तालाब की खोदाई कैसे संभव हो रही है, यह तो रोजगार सेवक से लेकर संबंधित अभियंता और कार्यक्रम पदाधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं। बताया जाता है कि बरसात में भी मिट्टी कार्य करने की छूट मिलते ही सिस्टम से जुड़े लोगों की लाटरी लग गई है।
7 सितंबर से जिले में संचालित योजनाओं की संख्या और कार्यरत मजदूरों का आंकड़ा
| तिथि | कुल योजना | मास्टर रोल की संख्या | कार्यरत कामगार |
|---|---|---|---|
| 07 सितंबर | 557 | 1893 | 16307 |
| 08 सितंबर | 492 | 1652 | 14396 |
| 09 सितंबर | 517 | 1701 | 14875 |
| 10 सितंबर | 516 | 1652 | 14396 |
| 11 सितंबर | 588 | 1949 | 17043 |
| 12 सितंबर | 619 | 2095 | 18092 |
| 13 सितंबर | 673 | 229 | 19613 |
| 14 सितंबर | 214 | 685 | 5824 |
| 15 सितंबर | 607 | 2050 | 17570 |
| 16 सितंबर | 313 | 948 | 7899 |
पारदर्शिता पर लग गया पहरा
मनरेगा में नेशनल मोबाइल मानिटरिंग सिस्टम पर काम करने वाले मजदूरों की अपलोड तस्वीर आम आदमी ऐप खोल कर देख सकता था। वीबी-जी रामजी में एनएमएमएस पर अपलोड तस्वीर सिर्फ अधिकारी ही देख सकते हैं।
इस तरह की शिकायत कहीं से नहीं मिली। मामला संज्ञान में आते ही संबंधित योजना में भुगतान जीरो कर दिया जाता है। - नीरज कुमार, डीपीओ, वीबी-जी रामजी, जमुई
