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जरा सी चूक और जा सकती है जान! जमुई में बिना रेलिंग वाली छत पर चल रही क्लास, 663 बच्चों पर महज सात शिक्षक

Published: Fri, 18 Sep 2026 12:55 PM (IST)

Jamui Jhajha School Danger Roof Class: जमुई के झाझा प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय उर्दू घोरिक्वा में 663 बच्चों के ...और पढ़ें

Jamui Jhajha School Danger Roof Class: जमुई के झाझा में बिना रेलिंग वाली छत पर पढ़ने को मजबूर नौनिहाल; 663 बच्चों पर सिर्फ 5 कमरे, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

Jamui Jhajha School Danger Roof Class: जमुई के झाझा में बिना रेलिंग वाली छत पर पढ़ने को मजबूर नौनिहाल; 663 बच्चों पर सिर्फ 5 कमरे, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

HighLights

  1. जमुई स्कूल में 663 छात्रों के लिए केवल पांच कमरे उपलब्ध।

  2. बिना रेलिंग वाली छत पर जान जोखिम में डालकर बच्चे कर रहे पढ़ाई।

  3. छात्रों और अभिभावकों ने तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की।

संवाद सहयोगी, जमुई। Jamui Jhajha School Danger Roof Class:  बिहार सरकार सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्र-छात्राओं की मुकम्मल सुरक्षा के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी धरातल पर व्यवस्था की बदहाली इन दावों की कलई खोल रही है। जमुई जिले के झाझा प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय उर्दू घोरिक्वा से सामने आई तस्वीर शिक्षा विभाग के बुनियादी ढांचे और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

विद्यालय में वर्ग एक से आठ तक नामांकित कुल 663 छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन का जिम्मा महज सात शिक्षकों के कंधों पर है। हद तो यह है कि इतने बड़े छात्र अनुपात के बावजूद पूरा विद्यालय केवल पांच कमरों के सहारे संचालित किया जा रहा है।

कमरों के घोर अभाव के चलते छोटे-छोटे मासूम बच्चे बरामदे, गलियारों और सर्द-गर्म फर्श पर बैठकर पढ़ने को विवश हैं। सबसे भयावह और रोंगटे खड़े कर देने वाली स्थिति विद्यालय भवन की छत पर देखने को मिल रही है। नीचे जगह नहीं बचने के कारण छत के ऊपर बने एक कमरे के पास खुले हिस्से में ढाई दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं को बेंच-डेस्क लगाकर बैठाया जा रहा है।

सबसे डरावना पहलू यह है कि इस पूरी छत के किनारे सुरक्षा के लिए कोई रेलिंग या बाउंड्री वॉल तक नहीं है। ऊपर से बच्चों के बैठने के लिए लगाई गई बेंच-डेस्क भी पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हालत में हैं। ऐसे में जरा सा संतुलन बिगड़ने पर कोई भी नौनिहाल सीधे नीचे गिर सकता है, जो सीधे तौर पर एक बड़े जानलेवा हादसे को निमंत्रण दे रहा है।

Jamui School Dangerous Rooftop Class 663 Students No Railing (1)

डर के साए में पढ़ाई, बच्चों ने लगाई सुरक्षा की गुहार

छत के खुले मुहाने पर पढ़ाई करने को मजबूर छात्र-छात्राओं ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि उन्हें वहां बैठने में हमेशा डर लगता रहता है। किनारे पर कोई दीवार या लोहे की रेलिंग न होने से उठते-बैठते वक्त हमेशा नीचे खाई में गिरने की आशंका बनी रहती है।

मासूम बच्चों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारियों से गुहार लगाई है कि किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किए बिना तत्काल छत पर मजबूत सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए, स्कूल परिसर की चहारदीवारी कराई जाए और अतिरिक्त सुरक्षित क्लासरूम का निर्माण कराया जाए। स्थानीय अभिभावकों का भी कहना है कि कमरों की कमी अपनी जगह है, लेकिन बिना रेलिंग की खुली छत पर बच्चों को बैठाना सीधे-सीधे उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करना है।

  • जमुई जिले के झाझा प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय उर्दू घोरिक्वा में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा का भारी संकट

  • पहली से आठवीं कक्षा तक नामांकित 663 बच्चों के लिए महज पांच कमरे उपलब्ध; जमीन, बरामदे और छत पर पढ़ाई करने की मजबूरी

  • बिना रेलिंग वाली खुली छत पर ढाई दर्जन से अधिक बच्चों को बैठाकर ली जा रही क्लास; क्षतिग्रस्त बेंच-डेस्क से बना रहता है जानलेवा खतरा

  • सवालों के घेरे में विद्यालय प्रबंधन; मीडिया के संज्ञान दिलाने पर बोले प्रभारी प्रधानाध्यापक- रेलिंग लगवाने का करेंगे प्रयास

Jamui School Dangerous Rooftop Class 663 Students No Railing (2)

सवाल पूछने पर टूटी प्रभारी एचएम की नींद

इस घोर लापरवाही को लेकर जब विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक रणधीर कुमार से तीखे सवाल किए गए, तब जाकर प्रबंधन की नींद खुलती दिखी। आनन-फानन में सफाई पेश करते हुए प्रभारी ने कहा कि जल्द ही छत पर रेलिंग लगवाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाएगा। हालांकि, हकीकत यह है कि लंबे समय से मासूमों की जान को इस तरह सूली पर चढ़ाकर कक्षाएं संचालित की जा रही थीं, जो विद्यालय प्रबंधन की आपराधिक उदासीनता को दर्शाता है।

प्रधानाध्यापक ने अपनी लाचारी गिनाते हुए कहा कि 663 बच्चों की संख्या के मुकाबले विद्यालय में केवल पांच कमरे ही उपलब्ध हैं। जगह के घोर संकट के कारण बच्चों को जमीन, बरामदे और मजबूरीवश छत पर शिफ्ट करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त पक्के कमरों के निर्माण के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों को कई बार मांग पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से हालात जस के तस बने हुए हैं।