विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यात्रा पूर्व ध्‍यान दें... जमुई-मलयपुर मार्ग पर पत्नेश्वर किऊल नदी पुल जर्जर हो गया है; नरियाना पुल पर यातायात बंद है

Published: Thu, 17 Sep 2026 11:09 AM (IST)

Jamui Malaypur Patneshwar Kiul River Bridge जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर स्थित पत्नेश्वर किऊल नदी पुल प्रशासनिक उपेक्षा के कारण जर्जर ...और पढ़ें

Jamui Malaypur Patneshwar Kiul River Bridge किऊल नदी पुल पर मंडराया बड़ा खतरा! जमुई में रेलिंग टूटी, छड़ें निकलीं बाहर; नरियाना पुल बंद होने से बढ़ा भारी दबाव

Jamui Malaypur Patneshwar Kiul River Bridge किऊल नदी पुल पर मंडराया बड़ा खतरा! जमुई में रेलिंग टूटी, छड़ें निकलीं बाहर; नरियाना पुल बंद होने से बढ़ा भारी दबाव

HighLights

  1. पत्तनेश्वर किऊल नदी पुल की रेलिंग टूटी, लोहे की छड़ें बाहर।

  2. नरियाना पुल बंद होने से पत्नेश्वर पुल पर बढ़ा भारी दबाव।

  3. ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत और तकनीकी जांच की मांग की।

संवाद सूत्र, बरहट (जमुई)। Jamui Malaypur Patneshwar Kiul River Bridge : जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर प्रसिद्ध पत्नेश्वर धाम के समीप किऊल नदी पर बना महत्वपूर्ण सड़क पुल इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी और बदहाली का दंश झेल रहा है। पुल की सुरक्षा के लिए दोनों किनारों पर लगाई गई कंक्रीट की मजबूत रेलिंग जगह-जगह से पूरी तरह टूटकर जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर कंक्रीट का प्लास्टर उखड़ चुका है और भीतर की लोहे की छड़ें नंगी होकर बाहर निकल आई हैं। इस बदहाली के कारण पुल से गुजरने वाले वाहनों के लिए हर समय सीधे नदी की गहरी खाई में समा जाने का गंभीर खतरा बना हुआ है।

भौगोलिक और यातायात के लिहाज से यह पुल पूरे क्षेत्र की लाइफलाइन माना जाता है। यह मार्ग न केवल जमुई रेलवे स्टेशन (मलयपुर) को जिला मुख्यालय से सीधे जोड़ता है, बल्कि भागलपुर, बांका, मुंगेर और झारखंड के देवघर की ओर जाने वाले भारी व्यावसायिक ट्रकों, बसों और हल्के वाहनों के आवागमन का सबसे मुख्य जरिया भी है।

नरियाना पुल क्षतिग्रस्त होकर बंद, पत्नेश्वर पुल पर बढ़ा वाहनों का रेला

हाल ही में क्षेत्र के नरियाना पुल के अचानक क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद सुरक्षा कारणों से वहां से भारी व हल्के वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके चलते जमुई, लखीसराय और आसपास के जिलों का समूचा रूट इसी पत्नेश्वर किऊल नदी पुल पर डायवर्ट कर दिया गया है।

  • जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर पत्नेश्वर धाम के पास किऊल नदी पर बना पुल प्रशासनिक उपेक्षा और जर्जरता का शिकार

  • कंक्रीट की सुरक्षा रेलिंग कई जगहों से टूटी, लोहे की छड़ें निकलीं बाहर; रात में अनियंत्रित होकर नदी में गिरने का जोखिम

  • नरियाना पुल क्षतिग्रस्त होकर बंद होने के बाद भागलपुर, बांका, देवघर, मुंगेर और जमुई स्टेशन का पूरा ट्रैफिक इसी मार्ग पर डायवर्ट

  • 1960 के दशक में बने पुराने पुल पर क्षमता से कई गुना अधिक बढ़ा भार; ग्रामीणों ने तकनीकी जांच व अविलंब मरम्मत की उठाई मांग

अचानक से चौबीसों घंटे चलने वाले भारी वाहनों और ट्रकों की संख्या में कई गुना इजाफा होने से इस पुराने पुल के बुनियादी ढांचे पर उसकी क्षमता से कहीं अधिक दबाव पड़ रहा है। रात के अंधेरे में या तेज गति से ओवरटेक करने के दौरान वाहनों के रेलिंग तोड़कर किऊल नदी में गिरने की आशंका से मुसाफिर सहमे रहते हैं। स्थानीय ग्रामीणों और चालकों का कहना है कि नियमित तकनीकी मुआयना और समय पर मेंटेनेंस न होने से पुल का ढांचा दिनों-दिन कमजोर होता जा रहा है।

1949 की प्रलयंकारी बाढ़ के बाद 1960 में बना था पुल, जांच की उठी मांग

पुल के ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर स्थानीय निवासी बच्चू तांती, संजय मंडल, मनोहर यादव और आलोक कुमार ने बताया कि वर्ष 1949 में किऊल नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान खैरा के तत्कालीन राजा रामनारायण सिंह द्वारा बनवाया गया ऐतिहासिक लोहे का पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। इसके बाद यातायात बहाल करने के लिए 1960 के दशक में वर्तमान कंक्रीट पुल का निर्माण कराया गया था।

छह दशक से भी अधिक पुराना हो चुका यह ढांचा अब भारी ट्रैफिक का बोझ उठाने में हांफ रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने जमुई जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) से पुरजोर मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पत्नेश्वर पुल की टूटी रेलिंग की युद्धस्तर पर मरम्मत कराई जाए। साथ ही पुल के पिलरों और गर्डर की भार वहन क्षमता (लोड कैपेसिटी) की तकनीकी जांच कराकर सुरक्षा के ठोस प्रबंध किए जाएं, ताकि किसी भी अप्रत्याशित और भीषण हादसे को समय रहते टाला जा सके।