बाप... आप कहां हो? हलफनामे में पिता का नाम छुपाने पर घिरे जमुई के MP अरुण भारती! LJPR नेता ने HAM विधायक को कहा रोगी
Jamui MP Arun Bharti Father Name Controversy जमुई सांसद अरुण भारती अपने चुनावी हलफनामे में पिता का नाम दर्ज न ...और पढ़ें
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Jamui MP Arun Bharti Father Name Controversy जमुई में NDA के दो दल आमने-सामने! हलफनामे से पिता का नाम गायब होने पर घिरे अरुण भारती, बयानों में लांघी गई मर्यादा
HighLights
सांसद अरुण भारती के हलफनामे में पिता का नाम नहीं।
हम विधायक ने उठाया सवाल, लोजपा-आर नेता की अमर्यादित टिप्पणी।
शैक्षणिक दस्तावेजों में पिता का नाम 'राम यश राम' दर्ज।
जागरण संवाददाता, जमुई। Jamui MP Arun Bharti Father Name Controversy"बाप आप कहां हो, सब लोग पूछ रहे हैं..." सोशल मीडिया पर यह कोई फिल्मी संवाद या भावुक अपील नहीं, बल्कि बिहार के जमुई कसांसद अरुण भारती के खिलाफ इंटरनेट पर वायरल हो रहे उस तीखे सियासी अभियान की बानगी है, जिसने बिहार के एनडीए कुनबे के भीतर जुबानी बारूद सुलगा दिया है। सांसद अरुण भारती द्वारा चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र (हलफनामे) में माता-पिता के कॉलम में केवल मां ज्योति का नाम दर्ज होने और पिता का नाम गायब रहने का मामला अब जमुई से लेकर पटना तक आग की तरह फैल चुका है।
इस सियासी बवंडर की शुरुआत तब हुई, जब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के जमुई जिला अंतर्गत सिकंदरा विधानसभा से विधायक प्रफुल्ल कुमार मांझी ने सार्वजनिक मंच से सीधे सांसद अरुण भारती से उनके पिता का नाम पूछ लिया। विधायक मांझी बाकायदा वोटर लिस्ट, नामांकन हलफनामा और अन्य दस्तावेज लहराते हुए जनता के बीच यह सवाल दाग रहे हैं कि एक निर्वाचित जननेता को अपने हलफनामे में पिता का नाम दर्ज कराने में क्या परहेज था?

मुर्दाबाद के नारे और मर्यादा तार-तार, MLA को बताया 'कुष्ठ रोगी'
विधायक के इस तीखे हमले के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कार्यकर्ता बिफर पड़े। उन्होंने सीधे केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और विधायक प्रफुल्ल मांझी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आलम यह रहा कि खुद सांसद अरुण भारती की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के खिलाफ 'मुर्दाबाद' के गगनभेदी नारे लगे। जवाब में 'हम' समर्थकों ने भी केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और सांसद अरुण भारती का पुतला फूंकने और मुर्दाबाद के नारों का सिलसिला शुरू कर दिया।
सांसद अरुण भारती के चुनावी हलफनामे में पिता का नाम दर्ज न होने पर सोशल मीडिया पर उठी तीखी मुहिम— 'बाप आप कहां हो?'
हम (HAM) विधायक प्रफुल्ल मांझी ने वोटर लिस्ट और हलफनामा दिखाकर पूछा सवाल; चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के समर्थकों में जुबानी जंग
लोजपा-आर नेता रविशंकर पासवान का अमर्यादित वीडियो वायरल, विधायक प्रफुल्ल मांझी को 'कुष्ठ रोगी' बताकर दूरी बनाने की दी सलाह
दैनिक जागरण के हाथ लगे शैक्षणिक व जाति प्रमाणपत्र, दर्ज है पिता का नाम 'राम यश राम'; सवाल— आखिर हलफनामे में क्यों छुपाया गया नाम?
शनिवार को इस विवाद ने उस वक्त बेहद घिनौना और शर्मनाक मोड़ ले लिया, जब लोजपा-आर के नेता रविशंकर पासवान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में रविशंकर पासवान मर्यादा की सारी हदें लांघते हुए लोगों को विधायक प्रफुल्ल मांझी से दूर रहने की नसीहत दे रहे हैं और उन्हें खुलेआम 'कुष्ठ रोगी' (कोढ़ी) करार दे रहे हैं। कानून के जानकारों की मानें तो दिव्यांगता या गंभीर बीमारी को लेकर किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस तरह की फब्ती कसना सीधे तौर पर संज्ञेय अपराध और मानहानि की श्रेणी में आता है।
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आरक्षण की चिंगारी से सुलगी आग
दरअसल, यह पूरी रार केवल एक नाम तक सीमित नहीं है। इसकी असली जड़ 'आरक्षण के भीतर आरक्षण (वर्गीकरण)' और समीक्षा के मुद्दे पर जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के बीच छिड़ी सैद्धांतिक जंग है। एनडीए के इन दो प्रमुख घटक दलों के बीच खींची तलवारों की धार दिन-ब-दिन इतनी जहरीली होती जा रही है कि शब्दों की मर्यादा दम तोड़ चुकी है।
इस पूरे सियासी दंगल पर जमुई पहुंचे पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने दोनों पक्षों को साफ नसीहत दी है कि सार्वजनिक जीवन में किसी के प्रति अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। राजनीति में संवाद की मर्यादा सबसे पहली शर्त है।
दस्तावेजों में नाम 'राम यश राम', तो फिर हलफनामे में पर्दादारी क्यों?
इस पूरे रहस्य और सियासी बवंडर के बीच दैनिक जागरण की विशेष पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया कि सांसद अरुण भारती के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और वर्ष 1998 में निर्गत जाति प्रमाणपत्र में उनके पिता का नाम स्पष्ट रूप से 'राम यश राम' दर्ज है।
अब विरोधी खेमे और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा का सबसे तीखा व चुभता सवाल यही है कि जब सभी आधिकारिक शैक्षणिक व जाति दस्तावेजों में पिता का नाम बाकायदा दर्ज है, तो फिर सांसद महोदय ने चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफनामे से पिता के नाम को क्यों गायब रखा? क्या पिता के इस दुनिया में न रहने पर एक पुत्र उनका नाम लिखना भूल जाता है, या फिर नाम सार्वजनिक करने के पीछे कोई असहज करने वाली राजनीतिक मजबूरी है? जनता के बीच उछल रहे इन असहज सवालों का सामना सांसद और उनकी पार्टी कैसे करेगी, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।
