जमुई: सरकारी योजना के नाम पर रोजगार सेवक ने लिए ₹80,500; शराब पीकर बदसलूकी का आरोप, DDC से कहा- ट्रांसफर कर दें
जमुई के चकाई प्रखंड में मनरेगा रोजगार सेवक पर सरकारी योजना के नाम पर ₹80,500 की अवैध डिजिटल वसूली का ...और पढ़ें

ग्रामीण ने डिजिटल पेमेंट के साक्ष्य के साथ अधिकारियों से की शिकायत; रुपये मांगने पर गाली-गलौज करने का आरोप
HighLights
रोजगार सेवक पर ₹80,500 की अवैध डिजिटल वसूली का आरोप।
मुखिया ने शराब पीकर बदसलूकी और फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगाया।
उप विकास आयुक्त से तत्काल स्थानांतरण और जांच की मांग।
संवाद सहयोगी, चकाई (जमुई)। जमुई जिले के चकाई प्रखंड अंतर्गत फरियताडीह ग्राम पंचायत में मनरेगा के रोजगार सेवक सौरभ कुमार पर सरकारी योजनाओं के नाम पर ₹80,500 की अवैध डिजिटल वसूली करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में पीड़ित ग्रामीण अमित कुमार दास ने डिजिटल लेनदेन (UPI/ऑनलाइन पेमेंट) की साक्ष्य प्रतियां संलग्न करते हुए वरीय अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
उधर, पंचायत की मुखिया प्रमिला देवी ने भी उप विकास आयुक्त (DDC) को पत्र लिखकर रोजगार सेवक पर शराब पीकर ग्रामीणों से गाली-गलौज करने, अकेली महिलाओं के घर में घुसने का प्रयास करने और फर्जी हस्ताक्षर बनाने जैसे संगीन आरोप लगाते हुए तत्काल प्रभाव से उनके स्थानांतरण की मांग की है।
योजना दिलाने के नाम पर ऑनलाइन वसूले ₹80,500, मांगने पर दी गालियां
पीड़ित अमित कुमार दास के अनुसार, रोजगार सेवक सौरभ कुमार ने सरकारी योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर अलग-अलग तिथियों में डिजिटल माध्यम से कुल 80,500 रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवाए। जब काफी समय बीतने के बाद भी योजना का कोई लाभ नहीं मिला, तो उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे।
आरोप है कि पैसे की मांग करने पर रोजगार सेवक उग्र हो गए और उनके साथ फोन व सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। पीड़ित ने अब ऑनलाइन लेनदेन के सभी प्रमाणों के साथ वरीय अधिकारियों से न्याय और राशि वापसी की मांग की है।
शराब पीकर पंचायत आने और फर्जी हस्ताक्षर का आरोप, मुखिया ने खोला मोर्चा
पंचायत की मुखिया प्रमिला देवी ने उप विकास आयुक्त को भेजे आधिकारिक शिकायत पत्र में रोजगार सेवक के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मुखिया का आरोप है कि रोजगार सेवक अक्सर शराब के नशे में धुत होकर पंचायत पहुंचते हैं और आम ग्रामीणों के साथ बदसलूकी करते हैं। इतना ही नहीं, उन पर अकेली महिलाओं के घरों में अनाधिकृत रूप से घुसने का प्रयास करने का भी आरोप है।
मुखिया ने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि रोजगार सेवक ने पंचायत समिति सदस्य के जाली हस्ताक्षर कर बिना काम कराए ही राशि की निकासी का प्रयास किया। साथ ही, वे मनरेगा और वीबीजी-रामजी जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे पंचायत के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
पूर्व में दबाई गई शिकायत, रोजगार सेवक ने आरोपों को नकारा
मुखिया के अनुसार, इस संबंध में 6 जुलाई को ही मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी (PO) को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई का अनुरोध किया गया था, लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब मुखिया ने डीडीसी से हस्तक्षेप करते हुए रोजगार सेवक को तत्काल प्रखंड से स्थानांतरित करने और विभागीय जांच कराने की मांग की है।
इधर, अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों पर रोजगार सेवक सौरभ कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन और मनगढ़ंत हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा रंजिश के तहत उन्हें फंसाने की साजिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
