जमुई में 10 महीने की बच्ची की मौत पर बवाल: परिजनों का गलत दवा का आरोप, अस्पताल में तोड़फोड़ और सड़क जाम
जमुई के एक निजी अस्पताल में 10 माह की बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और सड़क जाम कर दी।

निजी अस्पताल में 10 माह की बच्ची की मौत पर बवाल, सड़क जाम
HighLights
जमुई में 10 माह की बच्ची की मौत पर हंगामा।
परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही और मारपीट का आरोप लगाया।
आक्रोशित भीड़ ने सड़क जाम कर तोड़फोड़ भी की।
संवाद सहयोगी, जमुई। शहर के अतिथि पैलेस चौक के समीप स्थित शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएन झा के निजी अस्पताल में बुधवार की रात 10 माह की बच्ची की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। घटना से आक्रोशित स्वजनों ने अस्पताल प्रबंधन और कर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग को जाम कर दिया।
सड़क जाम होने से आवागमन बाधित हो गया। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने स्वजनों के आरोपों को खारिज करते हुए भीड़ पर तोड़फोड़ और अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
मृत बच्ची की पहचान लखीसराय जिले के कार्तिक पांडेय की 10 माह की पुत्री त्रिशा कुमारी के रूप में हुई है। बच्ची अपनी नानी के घर जमुई के नारडीह गांव आई हुई थी। घटना की सूचना पर टाउन थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित लोगों को समझाकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया।
दवा पिलाने के बाद बिगड़ी बच्ची की तबीयत, मौत का आरोप
बच्ची के पिता कार्तिक पांडेय ने बताया कि बुधवार की सुबह करीब छह बजे बुखार की शिकायत पर बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम में दवा पिलाने के बाद उसे लगातार उल्टियां होने लगीं। इसके कुछ देर बाद बच्ची की मौत हो गई। हालांकि, बच्ची की मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पिता के अनुसार, बच्ची की मौत के बाद परिजन शव लेकर अस्पताल पहुंचे थे। उनका आरोप है कि शुरुआत में अस्पताल कर्मियों ने बातचीत करने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई।
स्वजनों ने पुलिस की मौजूदगी में भी महिलाओं और पुरुषों के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। आक्रोशित परिजन चिकित्सक और संबंधित कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
अस्पताल प्रबंधन ने लगाया तोड़फोड़ का आरोप
दूसरी ओर, अस्पताल के कंपाउंडर संजीव कुमार ने स्वजनों के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि बच्ची को बुधवार सुबह करीब छह बजे बुखार की शिकायत पर लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद सुबह करीब 8:30 बजे उसकी स्थिति में सुधार होने पर स्वजन उसे घर ले गए थे।
उनके अनुसार, बच्ची की मौत घर पर हुई थी, जिसके बाद परिजन शव लेकर अस्पताल पहुंचे और हंगामा करने लगे।
कंपाउंडर ने आरोप लगाया कि इस दौरान आक्रोशित लोगों ने अस्पताल के आइसीयू और सामान्य वार्ड के कांच तोड़ दिए। साथ ही, अस्पताल कर्मी सचिन कुमार और नीतीश कुमार के साथ मारपीट की गई, जिसमें सचिन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों का सदर अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, घटना के समय वहां करीब 50 बच्चे भर्ती थे। झड़प के दौरान एक अन्य मरीज के स्वजन के भी चोटिल होने की सूचना है।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, कार्रवाई की मांग पर अड़े स्वजन
घटना के बाद टाउन थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई। सड़क जाम के कारण मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
परिजन दोषी चिकित्सक और कर्मियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने अपने कर्मियों पर हमले और अस्पताल में तोड़फोड़ की शिकायत उठाई।
दोनों पक्षों के आरोपों के बीच पुलिस स्थिति संभालने में जुटी रही। खबर लिखे जाने तक इलाके में तनाव बना हुआ था।
