कभी पुलिस को देख छिपते थे ग्रामीण, आज कलाई पर सजाई राखी; जमुई में DM-SP को रक्षासूत्र बांध फिर से की दोस्ती
जमुई में पूर्व माओवाद प्रभावित गांवों की महिलाओं ने डीएम और एसपी को राखी बांधी, जो प्रशासन के प्रति उनके ...और पढ़ें

माओवाद प्रभावित रहे गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड की महिलाओं ने समाहरणालय पहुंचकर डीएम नवीन और एसपी विश्वजीत दयाल को बांधी राखी
HighLights
पूर्व माओवाद प्रभावित गांवों की महिलाओं ने बांधी राखी।
जमुई डीएम नवीन और एसपी विश्वजीत दयाल को रक्षासूत्र।
प्रशासन के प्रति ग्रामीणों का बढ़ा विश्वास और जुड़ाव।
संवाद सहयोगी, जमुई। कभी एक-दूसरे के प्रति अविश्वास और टकराव का माहौल था, लेकिन आज वही हाथ एक-दूसरे की कलाई पर रक्षा का पवित्र सूत्र बांध रहे हैं। यह बदलते जमुई की नई और सकारात्मक तस्वीर है। माओवादी आतंक के साये में कभी पुलिस-प्रशासन को देखकर छिप जाने वाले गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड जैसे सुदूरवर्ती गांवों की अब सिर्फ तस्वीर ही नहीं बदली, बल्कि ग्रामीणों की सोच और दृष्टिकोण में भी गहरा बदलाव आया है।
इस बदलते परिवेश की खूबसूरत झलक रक्षाबंधन के अवसर पर देखने को मिली। पूर्व में माओवाद से प्रभावित रहे और अब मुख्यधारा से जुड़े परिवारों की महिलाएं शुक्रवार को समाहरणालय पहुंचीं। महिलाओं ने जिला पदाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल सहित अन्य वरीय प्रशासनिक अधिकारियों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर प्रशासन के प्रति अटूट विश्वास और आत्मीयता का भाव प्रकट किया।
जनता और प्रशासन के बीच मजबूत हुआ भावनात्मक जुड़ाव: डीएम
समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित इस आत्मीय कार्यक्रम में महिलाओं ने अधिकारियों को भाई मानकर रक्षासूत्र बांधा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर जिला पदाधिकारी नवीन ने कहा कि सुदूरवर्ती गांवों की महिलाओं का समाहरणालय आकर प्रशासन पर विश्वास जताना इस बात का प्रमाण है कि विकास और सुरक्षा के प्रयास सही दिशा में हैं।
डीएम ने कहा कि यह उनके लिए भी अत्यंत भावुक क्षण है। विधानसभा चुनाव के समय से ही इन क्षेत्रों के लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है और मूलभूत नागरिक सुविधाओं की कमी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जा रहा है। ग्रामीणों का यह स्नेह और विश्वास सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और मजबूत होते जन-प्रशासनिक संबंधों का परिणाम है।
मुख्यधारा में वापसी के बाद गांवों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं
कार्यक्रम में पहुंचीं महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि परिवार के सदस्यों के नक्सली गतिविधियों से बाहर निकलकर समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। पहले पुलिस को देखते ही ग्रामीण भय के कारण जंगलों और घरों में छिप जाते थे, लेकिन अब वे बिना किसी हिचकिचाहट के प्रशासनिक कार्यक्रमों में भागीदार बनते हैं।
महिलाओं ने कहा कि जिस तरह एक भाई अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है, ठीक उसी तरह जिला प्रशासन उनके क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास सुनिश्चित कर रहा है। अब गांवों के बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं, आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति हुई है, आपातकालीन एंबुलेंस व डॉक्टर की सेवा मिल रही है और हर घर तक राशन व नल का शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है।
