जमुई। जिले में खाद्य सुरक्षा कानून की खुले-आम धज्जियां उड़ रही हैं। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई को लेकर विभाग उदासीन बना हुआ है। खुले में खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं पर इसपर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है।

खाद्य सामग्री में मिलाए जा रहे जहर की जांच के लिए फूड इंस्पेक्टर ढूंढे नहीं मिलते। पर्व-त्योहार में तो जैसे खाने-पीने की दुकानों में नियम-कानून का मखौल ही उड़ जाता है। प्रतिबंधित रंग से बनी मिठाईयां हो या खुले में भिनभिनाती मक्खियां के साथ मानकों की धज्जियां उड़ाकर गंदे हाथों से फास्ट फूड परोसने के मामलों को जांचने वाला कोई नहीं है। मेले, पर्व-त्योहार और विशेष अवसरों पर तो आम दिनों में खुलने वाली दुकानों से कई गुणा अधिक टेम्परोरी सड़क के फूटपाथ पर मिठाई से लेकर हर प्रकार की खाने-पीने की दुकानें खुल आती हैं। पर इन दुकानदारों को कानून और नियम के अनुपालन का पाठ पढ़ाने वाला कोई नहीं है।

सिविल सर्जन ने कहा

इस बाबत जमुई के सिविल सर्जन डॉ. अजीत कुमार पूछने पर बताते हैं कि जमुई में कोई फूड इंस्पेक्टर नहीं हैं। मुंगेर के प्रभार में ही जमुई भी है। खाने-पीने की सामग्री की जांच-पड़ताल उनकी जिम्मेवारी में नहीं आता है। लेकिन, इतना तो तय है कि प्रतिबंधित रंगों और खुले में बिक रही मिठाई तथा फास्ट फूड के कारण डायरिया तथा गैस्ट्रोइंटाइटिस जैसी कई बीमारियां होती हैं।

ढूंढे नहीं मिलते फुड इंस्पेक्टर

फूड इंस्पेक्टर की तलाश में जागरण ने घंटों की मशक्कत की। जिलाधिकारी जमुई के विशेष नियंत्रण कक्ष से भी फूड इंस्पेक्टर का नंबर ढूंढना चाहा पर कहीं से भी न नंबर मिला और न यह पता चला कि जमुई में कोई फूड इंस्पेक्टर हैं तो उनका नाम क्या है।

खैर, जमुई के फूड इंस्पेक्टर राजेश्वर प्रसाद का पता चला, उनसे बात हुई। उन्होंने बताया कि वे मुंगेर प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के इंचार्ज हैं और मुंगेर में बैठते हैं। जमुई में करीब ढाई सौ दुकानें रजिस्टर्ड हैं। जहां तक खाने-पीने की सामग्री की जांच-पड़ताल का सवाल है तो उसके लिए एफ.ए.एस.एस.आई. के अंतर्गत लाइसेंस दिया जाता है।

कई बहाने बनाने लगे

खुले में सामान बेचने और जांच के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि दुकानों में खाद्य सामग्री की जांच प्रखंड स्तर पर सेनेटरी इंस्पेक्टर तथा नगर परिषद क्षेत्र में नगर परिषद की जिम्मेवारी हैं। प्रमंडल स्तर पर खुले हजारों की संख्या में दुकानों और कई जिलों के भ्रमण और जांच के लिए फूड इंस्पेक्टर के पास गाड़ी और अपने पुलिस बल का घोर अभाव है। उन्हें भ्रमण और छापेमारी के लिए स्थानीय प्रशासन का मोहताज रहना पड़ता है। ऐसे में जांच और कार्रवाई कहां तक संभव है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

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