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जमुई में 'लेडी बॉस' शिप्रा चौधरी की एंट्री: 3 दशक बाद महिला DDC संभालेंगी कुर्सी, अब दिखेगी IAS की धमक

Published: Thu, 27 Aug 2026 05:40 PM (IST)

जमुई जिले में 34 साल बाद एक महिला अधिकारी, शिप्रा विजय कुमार चौधरी, उप विकास आयुक्त (डीडीसी) का पदभार संभालेंगी। ...और पढ़ें

जमुई में 'लेडी बॉस' शिप्रा चौधरी की एंट्री: 3 दशक बाद महिला DDC संभालेंगी कुर्सी, अब दिखेगी IAS की धमक

जमुई में 'लेडी बॉस' शिप्रा चौधरी की एंट्री: 3 दशक बाद महिला DDC संभालेंगी कुर्सी, अब दिखेगी IAS की धमक

HighLights

  1. 34 साल बाद जमुई को मिली महिला उप विकास आयुक्त।

  2. शिप्रा विजय कुमार चौधरी ने डीडीसी का पदभार संभाला।

  3. 1992 में मृदुला सिन्हा थीं पहली महिला डीडीसी।

संवाद सहयोगी, जमुई। जिले के विकास की कमान 34 साल बाद एक बार फिर महिला अधिकारी के हाथ में होगी। वर्ष 1992 में जमुई की प्रथम उप विकास आयुक्त के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी मृदुला सिन्हा ने पद संभाला था। इसके बाद से अब तक पदस्थापित 28 उप विकास आयुक्तों की सूची में एक भी महिला अधिकारी का नाम दर्ज नहीं है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा की 2023 बैच की अधिकारी शिप्रा विजय कुमार चौधरी के जमुई उप विकास आयुक्त पद पर शुक्रवार को पदभार ग्रहण के साथ यह लंबा अंतराल समाप्त हो जाएगा। वे निवर्तमान डीडीसी सुभाष चंद्र मंडल से पदभार ग्रहण करेंगी।

उप विकास आयुक्त कार्यालय में लगी अधिकारियों की सूची इस प्रशासनिक बदलाव की पूरी कहानी बयां करती है। सूची में सबसे ऊपर मृदुला सिन्हा का नाम दर्ज है। उन्होंने जुलाई 1992 से 16 नवंबर 1992 तक उप विकास आयुक्त के रूप में कार्य किया था। उनके बाद लगातार पुरुष अधिकारी इस पद पर आते रहे।

IAS Shipra Choudhary

तीन दशक से अधिक समय तक नहीं मिली महिला अधिकारी को जिम्मेदारी

उप विकास आयुक्त की सूची में वर्ष 1992 से लेकर वर्ष 2025 तक कुल 28 अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के 11 और बिहार प्रशासनिक सेवा के 15 अधिकारी शामिल हैं, लेकिन मृदुला सिन्हा के बाद तीन दशक से अधिक समय तक किसी महिला अधिकारी को यह जिम्मेदारी नहीं मिली।

अब विकास योजनाओं में दिखेगी आईएएस की धमक

आईएएस अधिकारी शिप्रा चौधरी के पदभार संभालने के बाद जिले में ग्रामीण विकास, मनरेगा, आवास, पंचायत स्तर की योजनाओं और अन्य विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन आईएएस की धमक दिखेगी। इसकी झलक अभी से ही दिखने लगी है।

कार्यालय से लेकर फील्ड तक में कर्मियों और अधिकारियों की हलक सूख रही है। खासकर सरल स्वभाव के डीडीसी सुभाष चंद्र मंडल को बरगलाकर भ्रष्टाचार की रोटी सेकने वालों की सांस फूल रही है।

लालू-राबड़ी शासनकाल में आईएएस को ज्यादा मिला मौका

जमुई के उप विकास आयुक्त पद पर सेवा देने वाले अधिकारियों की सूची पर नजर डालें तो इस पद पर आईएएस अधिकारियों को 30 में 13 बार प्राथमिकता मिली। मजेदार बात तो यह है कि अराजकता और जंगल राज के लिए बदनाम लालू-राबड़ी शासनकाल में ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को सर्वाधिक मौका दिया गया।

1992 से 2005 के बीच लालू-राबड़ी शासनकाल में 14 डीडीसी की सूची में 11 आईएएस अधिकारी रहे। दिसंबर 2004 के बाद करीब 15 वर्षों के अंतराल पर नीतीश शासन में वर्ष 2020 में आरिफ अहसन पहली बार आईएएस अधिकारी डीडीसी बने।

यूपीएससी से सीधे चयनित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में हसन का सबसे लंबा कार्यकाल रहा। उन्होंने 27 अगस्त 2020 को योगदान किया था और 04 मई 2022 तक जमुई के विकास की गाड़ी को पटरी पर लाने का काम किया।

अब शिप्रा चौधरी के पदस्थापन से करीब सवा चार वर्ष बाद इस पद पर फिर आईएएस अधिकारी की वापसी हो रही है। कई लोग तो इस पोस्टिंग को सम्राट चौधरी की विकास के प्रति गंभीरता से जोड़कर देख रहे हैं। वैसे नव पदस्थापित अधिकारी की प्राथमिकता और कार्यशैली क्या होगी, यह तो आने वाला वक्त बताएगा।