जमुई। जिन कोरोना वॉरियर्स को बेहद खास तवज्जो दिया गया, जिनके लिए थाली और ताली बजाई गई, उन कोरोना वॉरियर्स में शामिल स्वास्थ्य विभाग के डाटा इंट्री ऑपरेटर चार महीने से वेतन के लिए भटक रहे हैं। सितंबर से उन्हें वेतन नहीं मिला है।

आर्थिक परेशानी से हर दिन उन्हें दो-चार होना पड़ रहा है। लिहाजा, डाटा ऑपरेटरों में अब निराशा और आक्रोश पनपने लगा है। डाटा ऑपरेटरों ने बताया कि सितंबर से अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया। इतना ही नहीं एक साल से ईपीएफ की राशि भी खाते में नहीं भेजी गई है। यहां बता दें कि डाटा ऑपरेटर का नियोजन एजेंसी द्वारा किया गया है। जिले में 55 डाटा ऑपरेटर कार्यरत हैं। इन पर कोरोना जांच रिपोर्ट, टीकाकरण रिपोर्ट, दवाई वितरण रिपोर्ट सहित अन्य रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी है। इनके द्वारा अपडेट की गई रिपोर्ट के आधार पर ही वरीय पदाधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाती है। कोरोना के अलावा जननी कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना आदि डाटा भी पोर्टल पर अपलोड करते हैं। बताया जाता है कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य विभाग में ऑनलाइन सुविधा का सारा दारोमदार इन डाटा ऑपरेटरों के कंधों पर ही है। डाटा ऑपरेटर रविद्र एवं रतन कुमार ने बताया कि वेतन नहीं मिलने से आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। पैसे का अभाव हो गया है। घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों व घर की दैनिक जरुरत भी बड़ी मुश्किल से पूरी हो पा रही है।

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कोट

डाटा ऑपरेटरों का वेतन उसके नियोजन एजेंसी से मिलता है। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ उपस्थिति बना कर एजेंसी को भेजता है। यहां से दैनिक उपस्थिति बनाकर भेज दी गई है।

डॉ. विज्येंद्र कुमार सत्यार्थी, सिविल सर्जन, जमुई

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