जमुई। विश्व स्तनपान सप्ताह प्रत्येक वर्ष अगस्त माह के पहले सप्ताह 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान एवं कार्य को ²ढ़तापूर्वक एकसाथ करने का समर्थन देता है। मां का दूध बच्चों के लिए अमृत के समान है। मां के दूध की तुलना किसी भी चीज से नहीं की जा सकती।

मां का दूध शिशु के लिए सर्वोपरि आहार होता है। कहते हैं, शिशु के जन्म के बाद मां का पहला दूध रक्षा कवच का काम करता है, परन्तु आधुनिकता की चकाचौंध इस पर भी हावी होने लगी है। माताएं नवजात बच्चों को अमृत पान कराने में रुचि नहीं ले रही हैं। अब इसे नयी संस्कृति का असर कहें या आधुनिक होने का ढोंग, आज की माताएं बच्चों को दूध पिलाने से विमुख होने लगी हैं। वे इसके महत्व को नहीं समझतीं, जबकि मेडिकल साइंस मां के दूध की तुलना अमृत से करता है। विभाग से जो आंकड़े मिले हैं वह चौकाने वाले हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो जमुई में लगभग 67 फीसद बच्चे ही जन्म के बाद एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध पीते हैं।

सदर अस्पताल के सीएस डॉ. विजेंद्र सत्यार्थी बताते हैं कि स्तनपान नवजातों एवं बच्चों में प्रारंभिक रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास कर उन्हें अन्य गंभीर रोगों से सुरक्षित करता है। इसलिए प्रत्येक साल स्तनपान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 1 अगस्त से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। कोरोना संक्रमण काल में स्वास्थ्य विभाग को अत्यधिक जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने बताया कि स्तनपान सप्ताह के दौरान आशा, आंगनबाड़ी सेविका एवं एएनएम घर-घर जाकर माताओं को स्तनपान करने के लिए जागरूक करेगी। स्तनपान सप्ताह के दौरान इसके लाभ के बारे में जानकारी देंगी। सामुदायिक कार्यकर्ता माताओं को भी स्तनपान के लाभ के बारे में बताएंगे। सिविल सर्जन ने बताया कि स्वस्थ बच्चा के लिए करें स्तनपान का समर्थन को इस वर्ष के थीम के रूप में चुना गया है। उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल में जन्म लिए बच्चे को एएनएम द्वारा प्रसूता को जागरूक कर करीब 90 फीसद बच्चों को स्तनपान कराया जाता है।

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कोलोस्ट्रम से भरपूर होता है मां का प्रथम दूध

सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरविद कुमार ने बताया कि मां के प्रथम दूध में कोलोस्ट्रम होता है, जो गाढ़ा, पीला दूध के साथ मिलता है। इसीलिए कहा जाता है कि बच्चे के जन्म के आधा घंटा के अंदर उसे जरूर स्तनपान कराना चाहिए। चिकित्सक कहते हैं यह दूध संक्रमण से बचाता है, प्रतिरक्षण करता है और रतौंधी जैसी बीमारी से भी बचाव करता है। इसमें निहित जरूरी पोषक तत्व, एंटीबॉडीज, हार्मोन, प्रतिरोधक कारक और ऐसे आक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो नवजात शिशु के बेहतर विकास और स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं।

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स्तनपान से कम हो जाता है स्तन कैंसर का खतरा

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू चौहान बताती हैं कि बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिला में स्तन कैंसर का खतरा कम हो जाता है। साथ ही स्तनपान डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बच्चों को सुरक्षित रखता है। इससे गर्भाशय के कैंसर का खतरा भी नगण्य हो जाता है। इसलिए हर मां को चाहिए कि वह अपने बच्चे को स्तनपान कराएं। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो बच्चे की सेहत से खिलवाड़ करती हैं। मां के दूध में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा और विटामिन की मात्रा बच्चे की उम्र के अनुसार बदल जाती है। कृत्रिम दूध में भी ये गुण रहते हैं, लेकिन वे बदलते नहीं हैं। शिशु के जन्म के बाद मां का पहला दूध रक्षा कवच का काम करता है। विटामिन, एंटीबॉडी व पोषक तत्वों से भरपूर मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए जन्म के एक घंटे के अंदर बच्चे को मां का दूध जरूर पिला देना चाहिए।

Posted By: Jagran

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