नवरात्र में हर रोज कटते हैं बकरे, बिहार के माहेश्वरी मंदिर में बलि की अनोखी परंपरा
सोनो के महेश्वरी गांव में मां माहेश्वरी भगवती मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान दस दिनों तक प्रतिदिन बकरे की बलि चढ़ाने की अनूठी परंपरा है।

माहेश्वरी मंदिर। फोटो जागरण
HighLights
महेश्वरी मंदिर में दस दिन तक प्रतिदिन बकरे की बलि।
शारदीय नवरात्र में विशेष तिथियों पर अतिरिक्त बलियां भी।
यह अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है।
संवाद सूत्र, सोनो (जमुई)। प्रखंड की दक्षिण-पश्चिमी पंचायत महेश्वरी में मां भगवती की आराधना की अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है।
कलोथर नदी की तट पर स्थित मां माहेश्वरी भगवती मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
यहां मां भगवती को लगातार दस दिनों तक प्रतिदिन एक बकरे की बलि चढ़ाने की परंपरा है। विशेष तिथियों पर अतिरिक्त बलि भी दी जाती है।
मान्यता है कि मां माहेश्वरी के नाम पर ही इस गांव का नाम महेश्वरी पड़ा। मंदिर में नवरात्र की पूजा पूरे विधि-विधान, निष्ठा और समर्पण के साथ की जाती है।
षष्ठी तिथि से ही धार्मिक अनुष्ठान
यहां षष्ठी तिथि से ही विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। बेलभरनी की रस्म के लिए अलग से बकरे की बलि दी जाती है।
सप्तमी तिथि को दो अतिरिक्त बकरे चढ़ाए जाते हैं। मां के नेत्र खोलने और चक्षुदान की परंपरा के तहत भी अलग-अलग बकरों की बलि दी जाती है।
अष्टमी की मध्यरात्रि में निशा बलि और दशमी की रात विशेष बलि की परंपरा निभाई जाती है। इस तरह नियमित बलि के अतिरिक्त विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भी बलि अर्पित की जाती है।
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