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महादलित वर्गीकरण पर जमुई सांसद अरुण भारती का जीतन राम मांझी पर हमला, कहा- नीतिगत सवाल पर परिवार को बना रहे निशाना

Published: Thu, 10 Sep 2026 06:29 PM (GMT+05:30)

Arun Bharti On Jitan Ram Manjhi: जमुई सांसद अरुण भारती ने बिहार में दलितों के वर्गीकरण पर केंद्रीय मंत्री जीतन ...और पढ़ें

HighLights

  1. जमुई सांसद अरुण भारती ने जीतन राम मांझी पर निशाना साधा।

  2. दलित-महादलित वर्गीकरण के नीतिगत सवालों पर उठाए प्रश्न।

  3. मांझी पर व्यक्तिगत हमले करने का आरोप लगाया भारती ने।

संवाद सहयोगी, जमुई। Arun Bharti On Jitan Ram Manjhi:  बिहार में दलितों के वर्गीकरण और महादलित श्रेणी की रूपरेखा को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जमुई सांसद अरुण भारती ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर तीखा हमला बोला है।

गुरुवार को जमुई पहुंचे सांसद ने परिसदन में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि उन्होंने जीतन राम मांझी से एक गंभीर नीतिगत सवाल पूछा था, जिसका उत्तर भी नीतिगत और तथ्यों पर आधारित होना चाहिए था। लेकिन, नीतिगत तर्कों का जवाब न होने के कारण अब उनके परिवार और व्यक्तिगत स्तर पर हमले किए जा रहे हैं।

सांसद अरुण भारती ने दो-टूक कहा कि उनका सवाल आज भी ज्यों का त्यों कायम है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए याद दिलाया कि वर्ष 2007 में बिहार में पहली बार दलितों का वर्गीकरण कर 'दलित' और 'महादलित' दो अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई थीं। उस दौर में जीतन राम मांझी खुद राज्य के एससी-एसटी कल्याण मंत्री थे और आगे चलकर वे बिहार के मुख्यमंत्री भी बने।

  • जमुई सांसद अरुण भारती ने पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर दलित-महादलित वर्गीकरण को लेकर साधा निशाना

  • कहा- नीतिगत सवाल पूछने पर व्यक्तिगत और पारिवारिक हमले कर रहे मांझी, 2007 के वर्गीकरण के वैज्ञानिक आधार पर उठाए सवाल

  • पासी, पासवान, रविदास और रजक जातियों को पहले बाहर रखने और फिर शामिल करने के औचित्य पर मांगी आधिकारिक समीक्षा रिपोर्ट

  • सांसद का सवाल- यदि वर्तमान फैसला सही है तो 2007 का निर्णय क्या गलत था? बीच के वर्षों में वंचित रहे लोगों के नुकसान का जिम्मेदार कौन?

इसके अलावा उनके पुत्र संतोष कुमार सुमन के पास भी यह महत्वपूर्ण विभाग लंबे समय तक रहा। ऐसे में यह सवाल पूरी तरह वाजिब है कि जिन जातियों को उस समय महादलित की श्रेणी में शामिल किया गया था, उन्हें बीते वर्षों में इस विशेष दर्जे से धरातल पर कितना लाभ मिला? क्या सरकार के पास इस नीति के प्रभाव को लेकर कोई आधिकारिक मूल्यांकन या समीक्षा रिपोर्ट मौजूद है?

चार जातियों को बाहर रखने का क्या था आधार?

सांसद अरुण भारती ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक समय पासी, पासवान, रविदास और रजक समाज को महादलित श्रेणी से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था। उन्होंने पूछा कि इन प्रमुख चार जातियों को विकास की इस विशेष धारा से वंचित रखने का पैमाना क्या था? क्या इसके पीछे कोई आधिकारिक सामाजिक-आर्थिक सर्वे था या कोई वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की गई थी?

उन्होंने आगे कहा कि अब जब इन्हीं चारों जातियों को दोबारा महादलित श्रेणी में शामिल कर लिया गया है, तो यह विरोधाभास पैदा करता है। यदि आज लिया गया यह निर्णय सही है, तो क्या वर्ष 2007 में लिया गया तत्कालीन फैसला गलत था? सांसद ने कड़े लहजे में पूछा कि उस त्रुटिपूर्ण नीतिगत निर्णय के कारण इन जातियों को बीच के लगभग डेढ़ दशक में सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और विशेष सुविधाओं का जो अपूरणीय नुकसान उठाना पड़ा, उसकी भरपाई आखिर कौन करेगा?

सांसद के सामने भड़के कार्यकर्ता, लगाए मुर्दाबाद के नारे

प्रेस वार्ता समाप्त होते ही उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब जमुई सांसद अरुण भारती की मौजूदगी में लोजपा (रामविलास) के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सांसद के सामने ही ‘जीतन राम मांझी मुर्दाबाद’ के जोरदार नारे लगाए, जिससे कुछ देर के लिए मौके पर भारी गहमागहमी की स्थिति उत्पन्न हो गई।

बयानों को लेकर उपजा असंतोष, सियासी हलचल तेज

कार्यकर्ताओं का दो-टूक कहना था कि पार्टी और समाज से जुड़े संवेदनशील नीतिगत मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री द्वारा दिए जा रहे हालिया बयानों से उनमें गहरा असंतोष है। सांसद अरुण भारती की मौजूदगी में हुई इस तीखी नारेबाजी ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना या टकराव नहीं हुआ और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।