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600 साल पुरानी धरोहर पर संकट, अतिक्रमण और कचरे की मार झेल रही बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर की शिवगंगा

Published: Thu, 18 Jun 2026 03:13 PM (IST)

महादेव सिमरिया स्थित 600 साल पुरानी बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर की शिवगंगा अतिक्रमण और कचरे के कारण अपनी पहचान खो रही है।

600 साल पुरानी धरोहर पर संकट

600 साल पुरानी धरोहर पर संकट

HighLights

  1. 600 साल पुरानी शिवगंगा अतिक्रमण और कचरे से प्रदूषित।

  2. स्थानीय लोगों ने जनभागीदारी से स्वच्छता की मांग की।

  3. नियमित सफाई अभियान और जागरूकता पर जोर दिया गया।

पंचायत सूत्र, महादेव सिमरिया(सिकंदरा)। महादेव सिमरिया (शिवडीह) स्थित ऐतिहासिक बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर की पहचान रही शिवगंगा आज स्वच्छता और संरक्षण की चुनौती से जूझ रही है। 

करीब 600 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही यह पवित्र जलराशि कभी अपनी निर्मलता और सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध थी, लेकिन बढ़ती आबादी, अतिक्रमण और कचरे के कारण इसकी स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। 

अतिक्रमण होने से गंदगी का दबाव बढ़ता गया

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिवगंगा केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। वर्षों पहले इसके चारों ओर खुला वातावरण था, लेकिन समय के साथ आबादी बढ़ने और अतिक्रमण होने से गंदगी का दबाव बढ़ता गया। 

मंदिर तक जाने वाले मार्ग के दोनों ओर दुकानें खुलने तथा उपयोग के बाद जूठे पत्तल और अन्य कचरे के जलाशय में फेंके जाने से इसकी स्वच्छता प्रभावित हो रही है। 

हर ग्रामीण, दुकानदार और श्रद्धालु का नैतिक दायित्व

ग्रामीण प्रताप सिंह, जय मंडल, रमाकांत मंडल, बनारसी पांडा एवं सुधीर पासवान ने संयुक्त रूप से कहा कि शिवगंगा को स्वच्छ रखना केवल मंदिर न्यास समिति या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर ग्रामीण, दुकानदार और श्रद्धालु का नैतिक दायित्व है। 

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर स्थानीय लोग स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं, उसी भावना को शिवडीह में भी अपनाने की जरूरत है। 

नियमित स्वच्छता अभियान चलाने की मांग

ग्रामीणों ने कहा कि मंदिर न्यास समिति समय-समय पर सफाई अभियान चलाती है, लेकिन जन सहभागिता के बिना स्थायी समाधान संभव नहीं है। 

उन्होंने शिवगंगा की पवित्रता और ऐतिहासिक गरिमा बनाए रखने के लिए सामूहिक जागरूकता एवं नियमित स्वच्छता अभियान चलाने की मांग की। उनका मानना है कि स्वच्छता में ही देवत्व का वास है और आस्था के इस सरोवर को बचाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।

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