जहानाबाद। पटना जिले के नौबतपुर थाना क्षेत्र के पिपलामा दरियापुर गांव के समीप शनिवार को जिस उदय यादव की हत्या की गई उसपर बहुचर्चित जेल ब्रेक कांड में शामिल रहने का आरोप था। 13 नवंबर 2005 को प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के हथियारबंद लोगों द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया था। माओवादियों द्वारा न सिर्फ मंडल कारा, आरक्षी केंद्र पर कब्जा जमा लिया गया था बल्कि शहर के आधे हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया गया था। मंडल में बंद अपने साथियों को छुड़ाने के उद्देश्य से माओवादियों द्वारा इस घटना को अंजाम दिए जाने के कारण जेल से 124 बंदी फरार हो गए थे। मंडल कारा में बंद अरवल जिले के ¨कजर थाना क्षेत्र के गनियारी गांव निवासी बड़े शर्मा के साथ ही भोजपुर जिले के एक बंदी की भी हत्या कर दी गई थी। माओवादियों द्वारा एक होटल कर्मी टेहटा निवासी की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह दरधा नदी में शौच करने के लिए गया था। शौच कर वापस लौटने के दौरान उसकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना को अंजाम देने के बाद नक्सलियों द्वारा जेल ब्रेक कांड पर एक पुस्तक प्रकाशित किया गया था जिसमें उसने उस होटल कर्मी की हत्या पर खेद व्यक्त किया था। उनलोगों द्वारा जेल का फाटक तोड़ने के साथ ही मंडल कारा के दो आरक्षी की भी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के कारण पूरे देश में बबेला मचा था। बताया जाता है कि लंबे दिनों तक नक्सली संगठन में शामिल रहने के बाद उदय यादव संगठन से अलग हो गया था और रंगदारी वसूलने का काम कर रहा था।

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