जहानाबाद। सुविधाओं और रोजगार के लिए लोग शहर में बस रहे हैं। लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है। इस मुश्किल को बढ़ाने में लोगों का लालच और मानसिकता बड़ा कारण है। जहानाबाद शहर में अतिक्रमण की समस्या नासुर बन चुकी है। शहर अतिक्रमण के मकड़जाल में इस कदर फंस चुका है कि अब इस समस्या को दूर करना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर हो गयी है। अतिक्रमण वह समस्या है, जिसे समय रहते दूर नहीं किया जाए तो फिर धीरे-धीरे बढ़कर शहर के जीवन को बदहाल बना देती है। शहर से गुजरने वाला एनएच तो अतिक्रमण का शिकार है ही, इससे भी बदहाल स्थिति बाजार की गलियों की है। शहर के मलहचक मोड़ से लेकर बाजार होते हुए हॉस्पिटल मोड़ तक सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण की समस्या है। दुकानदारों ने नालियों के ऊपर पक्का अतिक्रमण कर रखा है,वहीं सामान को दुकान के बाहर सड़क पर कई फुट तक लगा देते हैं। दोनों ओर अतिक्रमण के कारण सड़क काफी संकीर्ण हो जाती है। ऊपर से ठेले वालों ने कोढ़ में खाज की हालत कर रखी है। ऐसे में राहगीरों और बाइक सवारों को निकलने के लिए जगह नहीं मिलती और जाम लगा रहता है। अगर कहीं से कोई चार पहिया वाहन घुस गया फिर तो काफी देर तक भयंकर जाम लग जाता है। अतिक्रमण करने वालों का हौसला इतना बुलंद होता जा रहा है वहीं प्रशासन कुंभकर्णी नींद में है। पटना-गया रोड हो चुका है अतिक्रमणकारियों का शिकार शहर के बीचोबीच से गुजरने वाला एनएच 83 पर अतिक्रमण डीएम आवास के पास काको मोड़ से ही शुरू हो जाता है, जो आंबेडकर चौक तक दोनों तरफ देखा जा सकता है। फुटपाथ पर दुकानदारों का कब्जा है, जिन्होंने अपनी दुकानों को आगे तक बढ़ा रखा है, वहीं फुटपाथ के बाद ठेले, खोमचे, रेहड़ी वालों की दुकान सजती हैं।उसके बाद जो जगह बचती है, उस पर अवैध पार्किंग होती है। जहां दो पहिया और चार पहिया वाहन खड़े रहते हैं कई जगह रसूखदार दुकानदारों ने रोड के एक हिस्से को दुकान की पार्किंग के लिए अवैध तरीके से डेवलप कर लिया है। हालांकि क्लीन सीटी योजना के तहत अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हुआ था जिससे लोगों में उम्मीद जगी थी। आखिरकार यह अभियान भी अंजाम तक नहीं पहुंच सका और कुछ ही दिनों में अतिक्रमणकारी अपनी जगह पर वापस आ गए।

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