बेटों से दूर जहानाबाद के वृद्धाश्रम में जिंदगी, जितिया पर फिर भी उन्हीं के नाम की दुआ
जहानाबाद के एक वृद्धाश्रम में रह रहीं माताओं ने बेटों द्वारा छोड़े जाने के बावजूद जितिया का व्रत रखा, उनकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की।

नहाय खाय का अनुष्ठान करतीं वृद्ध आश्रम में रहने वाली माताएं। सौजन्य: आश्रम
HighLights
जहानाबाद वृद्धाश्रम की माताओं ने बेटों के लिए जितिया व्रत रखा।
बेटों द्वारा छोड़े जाने पर भी माताओं ने लंबी उम्र मांगी।
वृद्धाश्रम प्रबंधन ने व्रत रखने वाली माताओं को सहायता प्रदान की।
राकेश कुमार, जहानाबाद। तुमने चाहे मुझे कितना भी दुख दिया हो, मेरी दुआ फिर भी तुम्हारे साथ रहेगी... यह सिर्फ एक मां के शब्द नहीं, बल्कि उन तमाम माताओं के दिल की आवाज है, जो जीवन के अंतिम पड़ाव में अपनों से दूर हैं।
वृद्धाश्रम में रहने वाली सुमंती देवी, देवमाती देवी और दौलती देवी के लिए जितिया का व्रत सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बेटों के प्रति उनकी अटूट ममता का प्रतीक है।
वृद्धाश्रम में रह रहीं माताओं ने व्रत रख मांगी पुत्रों की लंबी उम्र
कभी जिन हाथों ने बेटों की उंगली थामकर उन्हें चलना सिखाया था, आज उन्हीं हाथों को सहारे की जरूरत है। जीवन के अंतिम पड़ाव में अपनों का साथ नहीं मिला।
परिवार से दूर वृद्धाश्रम में जिंदगी गुजार रहीं इन माताओं की आंखों में अपनों से बिछड़ने का दर्द साफ झलकता है। बेटों से शिकायत है, उनकी बेरुखी का मलाल भी है, लेकिन मां का दिल कहां शिकायतों को लंबे समय तक संभाल पाता है।
जितिया के मौके पर उनकी जुबां से निकली हर दुआ में बेटों की लंबी उम्र और खुशहाल जिंदगी की कामना रही। यही मां की ममता है।
दिल टूट जाए, रिश्ते छूट जाएं, लेकिन औलाद के लिए दुआ कभी नहीं छूटती। शुक्रवार को महिलाओं ने नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत की।
पुत्रों ने छोड़ा लेकिन उनकी लंबी उम्र की कामना
शनिवार को वे पुत्रों की सलामती के लिए निर्जला उपवास रखेंगी। अधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण वृद्धाश्रम की सभी महिलाएं कठिन व्रत नहीं रख सकीं।
प्रबंधन ने स्वास्थ्य को देखते हुए कई महिलाओं को निर्जला उपवास न करने की सलाह दी। इसके बावजूद तीन वृद्ध महिलाओं ने पूरी श्रद्धा के साथ व्रत करने का संकल्प लिया।
व्रत के लिए आवश्यक पूजा सामग्री भी वृद्धाश्रम प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराई गई। यहां करीब 40 वृद्ध पुरुष और महिलाएं रह रहे हैं, जिनमें आधे से अधिक महिलाएं हैं।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर कुंदन कृष्णन और व्यवस्थापक अरविंद कुमार ने बताया कि सभी महिलाओं की व्रत रखने की इच्छा थी, लेकिन उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए सावधानी बरती गई।
बुजुर्गों के लिए भोजन, नाश्ते के साथ मनोरंजन की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। संचालक ने कहा कि ये माताएं बेटों से दूर जरूर हैं, लेकिन उनकी दुआ में आज भी वही ममता है। हम भी इनकी सेवा बेटे बनकर करने का प्रयास करते हैं।
