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जहानाबाद में पंचायत चुनाव का नया गणित: 1991 से 2011 के बीच तेजी से बढ़ी आबादी; बदल सकता है समीकरण

Published: Tue, 25 Aug 2026 01:36 PM (IST)

जिले में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच 1991 और 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों की अनुमानित आबादी ...और पढ़ें

जहानाबाद में करीब चार लाख बढ़ी आबादी। सांकेत‍िक तस्‍वीर

जहानाबाद में करीब चार लाख बढ़ी आबादी। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. जहानाबाद की आबादी 20 साल में 3.85 लाख बढ़ी।

  2. पंचायत चुनाव के लिए आबादी निर्धारण प्रक्रिया तेज हुई।

  3. घोसी में आबादी वृद्धि की रफ्तार सबसे तेज रही।

जागरण संवाददाता, जहानाबाद। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच आबादी के निर्धारण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है।

1991 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर जिले की पंचायतों की वर्तमान अनुमानित आबादी तय की जाएगी।

उपलब्ध आंकड़ों पर गौर करें तो 20 वर्षों में जिले की आबादी में करीब 3.85 लाख की वृद्धि हुई है। 1991 में जिले के सात प्रखंडों की कुल आबादी 6.05 लाख थी,जो 2011 में बढ़कर करीब 9.90 लाख हो गई।

पंचायतों की नई आबादी तय करने में होगा इस आंकड़ों का इस्तेमाल

इस तरह दो दशकों में आबादी में लगभग 63.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रखंडवार आंकड़ों में सबसे अधिक आबादी वृद्धि मखदुमपुर में हुई है।

यहां 1991 में आबादी 1,48,986 थी, जो 2011 में बढ़कर 2,28,160 पर पहुंच गई। इस प्रकार आबादी में 79,174 की वृद्धि हुई।

वहीं काको प्रखंड की आबादी 96,432 से बढ़कर 1,73,487 हो गई। यहां 77,055 की वृद्धि दर्ज की गई। घोसी प्रखंड में वृद्धि की रफ्तार सबसे तेज रही।

1991 में यहां की आबादी 49,010 थी, जो 2011 में बढ़कर 1,08,130 हो गई। यानी दो दशक में आबादी 59,120 बढ़ी,जो 1991 की आबादी की तुलना में करीब 120.6 प्रतिशत अधिक है।

काको में 80 फीसद तक की वृद्ध‍ि 

सदर प्रखंड में भी 53,615 की वृद्धि हुई। यहां आबादी 97,976 से बढ़कर 1,51,591 हो गई। रतनी फरीदपुर में 49,983 हुलासगंज में 35,398 तथा मोदनगंज में 30,410 की आबादी वृद्धि दर्ज की गई।

प्रतिशत के लिहाज से घोसी के बाद काको में करीब 80 प्रतिशत वृद्धि हुई है। हालांकि घोसी और काको अब नगर पंचायत बन गया है। जिसके कारण घोसी में तीन तथा काको में दो ग्राम पंचायत नगर पंचायत में शामिल हो गए।

इस तरह से अब 1991 की तुलना में पांच ग्राम पंचायत कम हो गए हैं। इस बार के पंचायत चुनाव में 1991 और 2011 के बीच हुई आबादी वृद्धि के औसत को आधार बनाकर पंचायतवार वर्तमान अनुमानित आबादी निर्धारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसी अनुमानित आबादी का प्रभाव आगामी पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर के निर्धारण पर भी पड़ने की संभावना है। ऐसे में पुराने जनगणना आंकड़ों में हुई आबादी वृद्धि पंचायतों की नई तस्वीर तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ग्राम पंचायत के आरक्षण की वर्तमान स्थिति

जिले में वर्तमान में कुल 88 पंचायतें हैं। मुखिया पद के लिए इनमें 53 पंचायतें सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित हैं, हालांकि इनमें महिलाओं के लिए आरक्षण लागू है।

शेष पंचायतें पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जिनमें महिला सीटें भी निर्धारित की गई हैं। सदर प्रखंड में कुल 14 पंचायतों में नौ सामान्य वर्ग के लिए हैं, जिनमें चार महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

तीन पंचायतें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जिनमें एक महिला सीट शामिल है। वहीं पिछड़ा वर्ग के लिए एक पंचायत महिला हेतु सुरक्षित है।

रतनी फरीदपुर प्रखंड 14 पंचायतों में 10 सामान्य वर्ग के लिए हैं,जिनमें पांच महिला सीटें हैं। पिछड़ा वर्ग के लिए चार पंचायतें आरक्षित हैं,जिनमें दो महिलाओं के लिए हैं।

अलग-अलग श्रेण‍ियों में आरक्ष‍ित हैं पंचायतें 

अनुसूचित जाति के लिए भी चार पंचायतें आरक्षित हैं, जिनमें दो महिला सीटें शामिल हैं। हुलासगंज प्रखंड में कुल नौ पंचायतों में छह सामान्य वर्ग के लिए हैं, जिनमें तीन महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

एक पंचायत पिछड़ा वर्ग तथा दो पंचायतें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं,जिनमें एक महिला सीट शामिल है। घोसी प्रखंड में सात पंचायतों में तीन सामान्य वर्ग के लिए हैं, जिनमें एक महिला सीट है।

अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए दो-दो पंचायतें आरक्षित हैं,जिनमें एक-एक महिला सीट निर्धारित की गई है। मोदनगंज प्रखंड में आठ पंचायतों में पांच सामान्य वर्ग के लिए हैं, जिनमें दो महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए दो-दो पंचायतें आरक्षित हैं,जिनमें एक-एक महिला सीट शामिल है। काको प्रखंड में 14 पंचायतों में सात सामान्य वर्ग के लिए हैं, जिनमें तीन महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए तीन-तीन पंचायतें आरक्षित हैं,जिनमें एक-एक महिला सीट सुनिश्चित की गई है।