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तेल मिल खोलकर शुरू करें अपना कारोबार, बिहार सरकार देगी 33% तक अनुदान; आवेदन की पूरी जानकारी लें

Published: Fri, 28 Aug 2026 01:04 PM (IST)

जहानाबाद में राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन के तहत तेल मिल स्थापित करने के लिए 15 सितंबर तक आवेदन मांगे गए ...और पढ़ें

तेल म‍िल से बढ़ेगा स्‍वरोजगार। सांकेत‍िक तस्‍वीर

तेल म‍िल से बढ़ेगा स्‍वरोजगार। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. जहानाबाद में तेल मिल स्थापना हेतु आवेदन आमंत्रित।

  2. राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन के तहत 33% अनुदान।

  3. स्वरोजगार और आय बढ़ाने का सुनहरा अवसर।

जागरण संवाददाता, जहानाबाद। तेल मिल स्थापित कर स्वरोजगार के साथ अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर किसानों और उद्यमियों को मिलने जा रहा है।

राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (NMEO-OS) के तहत जहानाबाद जिले में तेल प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने की योजना शुरू की गई है।

इसके लिए इच्छुक आवेदकों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन की प्रक्रिया 15 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 15 सितंबर तक आवेदन किया जा सकेगा।

33 प्रत‍िशत तक म‍िलेगा अनुदान 

केंद्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर तेल के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की व्यवस्था विकसित करना है।

योजना के तहत करीब 25 लाख रुपये की परियोजना लागत वाली 10 टन क्षमता की तेल मिल स्थापित करने पर अधिकतम 9.90 लाख रुपये अथवा परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अनुदान के रूप में दिया जाएगा।

इससे इच्छुक किसान, उद्यमी, एफपीओ, सहकारी संस्थाएं तथा अन्य पात्र संस्थाएं तेल प्रसंस्करण के क्षेत्र में कारोबार शुरू कर सकती हैं।

केंद्र सरकार की योजना में पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत तेल निकालने और प्रसंस्करण की व्यवस्था विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

ऑनलाइन आवेदन के दौरान आवेदक को परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर), आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण, बैंक ऋण स्वीकृति से संबंधित कागजात और संस्था का पंजीकरण प्रमाणपत्र अपलोड करना होगा।

विभाग की ओर से आवेदन की जांच के बाद पात्र आवेदकों को नियमानुसार योजना का लाभ दिया जाएगा। आवेदकों को आवेदन से पहले परियोजना से संबंधित सभी शर्तों और पात्रता की जानकारी अच्छी तरह जांच लेने की सलाह दी गई है।

योजना में भूमि खरीदने तथा शेड या भवन निर्माण पर होने वाले खर्च को सब्सिडी योग्य लागत में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे में आवेदकों को परियोजना तैयार करते समय मशीनरी और तेल प्रसंस्करण से संबंधित मदों को ध्यान में रखकर ही डीपीआर तैयार करनी होगी।

स्थानीय स्तर पर बढ़ेगा तिलहन का मूल्य

कृषि विभाग का मानना है कि जिले में तेल मिल स्थापित होने से किसानों को तिलहन फसलों के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार मिल सकता है। सरसों, मूंगफली, तिल सहित अन्य तिलहन फसलों के उत्पादन को इससे प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

अभी किसानों को कई बार अपनी उपज दूसरे बाजारों में ले जाकर बेचनी पड़ती है। जिले में ही प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होने पर परिवहन खर्च घटने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन को देश में खाद्य तेल के उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

मिशन के तहत तिलहन उत्पादन के साथ कटाई के बाद की व्यवस्था, तेल निष्कर्षण और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार ने 2030-31 तक देश में तिलहन उत्पादन को 69.7 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

तेल मिल की स्थापना किसानों के लिए स्वरोजगार और आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकती है। इच्छुक पात्र व्यक्ति निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करें और योजना का लाभ उठाएं।

- संभावना, जिला कृषि पदाधिकारी