जहानाबाद। धरती की हरियाली अन्नदाताओं की कमाई नदी के अस्तित्व के साथ जुड़ा हुआ है। खाद, उर्वरक, कीटनाशक एवं आधुनिक यंत्र चाहे जो भी कृषि कार्य के लिए सरकार उपलब्ध कराए लेकिन जब तक नदी का पानी भूमि को सिचित नहीं करेगी ये सभी मानव निर्मित संसाधन अपना प्रभाव नहीं दिखा पाएंगे। फिलहाल जिले से गुजरने वाली दरधा नदी के अस्तित्व पर संकट के बादल मडरा रहे हैं उससे चिता लाजमी है। आने वाली पीढ़ी भी अपने खेतों में फसल उपजा सके। इसके लिए यह जरूरी है कि दरधा को पुन जीवित करने की कवायद प्रारंभ किया जाए। हालांकि जिम्मेदार लोग अभी भी इस दिशा में आगे नहीं आ रहे हैं। नदियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की बात करने वाली सामाजिक संगठन से जुड़े लोग भी मुखर होकर अपनी बातें नहीं रख रहे हैं। इस हालात में इलाके के किसान भविष्य की संभावित खतरे को देख सहमे हुए जरुर है। उनलोगों का पूरा विश्वास है कि यदि इस दिशा में जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तब वह दिन दूर नहीं कि सोना उगलने वाली भूमि बेकार व बंजर हो जाएगी। किसानों की इन चिताओं को देखते हुए दैनिक जागरण ने इस बड़ी समस्या को समाज तथा अधिकारियों के समक्ष रखने की मुहिम चला रखी है। अब जरुरत है इस अभियान से जन जागरण के साथ-साथ व्यवस्था के जिम्मेदार लोग पहल की दिशा में कार्य प्रारंभ करें। हालांकि जिस तरह से जल जीवन हरियाली योजना सूबे की सरकार प्रारंभ की है। उससे आशा की किरण जरूर नजर आ रही है। इनसेट

सदन में उठाएंगे आवाज

दरधा नदी की बदहाली दूर करना किसानों के जीविकोपार्जन से जुड़ा हुआ है। हमलोग इसे लेकर हमेशा लोगों को सजग ही करते रहते हैं। लेकिन अतिक्रमण रोकने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रही है। यही कारण है कि नदी में लोग घर तक निर्माण करने लगे हैं। इसे लेकर विधानसभा के बजट सत्र में आवाज बुलंद करूंगा। सरकार के समक्ष मेरे द्वारा नदी को बचाने के लिए सार्थक योजना बनाने की मांग होगी। किसानों के साथ किसी भी सूरत में अन्याय नहीं हो। यह हमलोगों जैसे जनप्रतिनिधियों को क‌र्त्तव्य बनता है। एक ओर सरकार जल जीवन हरियाली योजना के नाम पर गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी उजाड़ रही है। वहीं दूसरी ओर महत्वपूर्ण नदी पर बनाए गए बहुमंजिले इमारते को हटाने की जहमत नहीं उठा रही है। शहर में दो दर्जन से अधिक मकान नदी को अतिक्रमण कर बनाए गए हैं।

रामबली सिंह यादव

घोसी विधायक

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प्राकृतिक धरोहर ही नहीं बल्कि जीने का सहारा है यह नदी

दरधा नदी जिले के लिए मात्र प्राकृतिक धरोहर ही नहीं बल्कि किसानों के जीविका का प्रमुख सहारा है। इस महत्वपूर्ण नदी की बदहाली प्रशासनिक विफलता का ही परिणाम है। हर खेत तक पानी पहुंचाने की बात तो होती है लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि वर्षों से नदी को समाप्त करने की मुहिम चल रही है लेकिन इस पर रोकथाम नहीं लगाया जा रहा है। इसे लेकर जनप्रतिनिधि होने के नाते हमलोगों दायित्व बढ़ जाता है।जनजागरण के साथ-साथ सरकार के समक्ष इसकी जीर्णोद्धार की मांग रखी जाएगी। यदि इसके बावजूद भी इस दिशा में कार्य प्रारंभ नहीं होंगे तो जन आंदोलन चलाया जाएगा।

सतीश कुमार

मखदुमपुर विधायक

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शहर के कूड़े कचड़े व नाली-नालियों का व्यवस्थित हो स्थान

शहर में दरधा नदी की बदहाली के पीछे अतिक्रमण तो बड़ा वजह है ही। नदी को नुकसान पहुंचाने में कूड़े कचरे के ढेर व नाले-नालियों का गंदा पानी महत्वूपर्ण भूमिका निभा रहा है। इस बड़ी समस्या को उजागर करने के लिए दैनिक जागरण को आभार व्यक्त करता हूं। नदी के जीर्णोद्धार को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ केंद्र तथा राज्य की सरकार के समक्ष कार्य योजना बनाने का मांग रखा जाएगा।नदियों की जोड़ने की केंद्रीय योजना अधर में लटकी हुई है। इस इलाके में यह योजना क्रियान्वित हो इसे लेकर मंत्रालय से संपर्क साधा जाएगा। हर हाल में दरधा के पुराने दिन लौटाने हैं। इसके लिए चाहे आंदोलन का ही रास्ता क्यों ने अख्तियार करना पड़े।

कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव

जहानाबाद

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