मखदुमपुर, जहानाबाद: कोरोना महामारी के बीच सोमवार की सुबह दो तरह की तस्वीरें देखने को मिली। एक तरफ कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ रहा था, तो दूसरी तरफ छठ घाटों पर आस्था की भीड़ थी। दोनों ही तस्वीरें लोगों को सतर्क करने के लिए कह रही थी। बावजूद लोग अपने हिसाब से इसकी व्याख्या कर रहे थे।

सोमवार की सुबह छठ घाटों पर जिस तरह से लोगों की भीड़ देखी गयी उससे एक बारगी तो ऐसा लगा कि कोरोना का तो कहीं खौफ ही नहीं है। पहले की तरह ही लोगों की भीड़, पूजा-पाठ सब कुछ पहले की तरह ही। हां कानों से लटकता मास्क, इस बात का महज एहसास दिला रहा था कि कोरोना काल चल रहा है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़े हैं, उसमें लोगों को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वर्ष 2020 और आज का कोरोना काल। जानकार बताते हैं कि इस बार का वेरिएशन पिछले बार की तुलना में ज्यादा खतरनाक है। ऐसे में हमें और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। दिन प्रतिदिन कोरोना मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। जिस तरह की खबरें आ रही है उससे इसकी भयवक्ता का पता चलता है। सरकार और प्रशासन इसको देखते हुए कई कदम उठा रही है। नाइट क‌र्फ्यू और कंटेंमेंट जोन बनाने का फैसला सरकार के स्तर पर लिया गया है। ऐसे में खुद को और ज्यादा सजग और दूसरों को सचेत करने की आवश्यकता है। बहरहाल सोमवार को यहां के छठ घाटों पर उमड़ी आस्था की भीड़ बता रही थी कि कोरोना पर आस्था भारी है।

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