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बिहार में पंचायतों का बदलेगा नक्शा, परिसीमन के लिए डिजिटल मैपिंग तेज

Published: Sat, 05 Sep 2026 03:34 PM (GMT+05:30)

जहानाबाद में पंचायतों के परिसीमन को सटीक बनाने के लिए डिजिटल मैपिंग शुरू हो गई है। मोबाइल ऐप के जरिए ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड फोटो

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HighLights

  1. जहानाबाद में पंचायत परिसीमन के लिए डिजिटल मैपिंग शुरू।

  2. मोबाइल ऐप से 1785 गांवों-टोलों की भौगोलिक स्थिति दर्ज।

  3. प्रत्येक गांव के नौ प्रमुख स्थानों की हो रही मैपिंग।

जागरण संवाददाता, जहानाबाद। वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ ही आगामी चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। संभावित आरक्षण रोस्टर में बदलाव के बीच अब पंचायतों के परिसीमन की कवायद शुरू हो गई है।

प्रशासन ने परिसीमन प्रक्रिया को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए जिले के सभी गांव और टोलों की डिजिटल लोकेशन मैपिंग शुरू कर दी है।

मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से जिले के 1785 गांव-टोलों की भौगोलिक स्थिति दर्ज की जा रही है। इसके लिए फील्ड में लगाए गए कर्मियों को संबंधित स्थान पर पहुंचकर जीपीएस के माध्यम से अक्षांश और देशांतर की सटीक लोकेशन एप पर अपलोड करनी है।

इस कार्य को हर हाल में 10 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर पंचायत परिसीमन की प्रारंभिक प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर शुरू की गई थी।

इसके बाद वर्ष 1991 के आंकड़ों को भी शामिल कर दोनों जनगणनाओं के बीच जनसंख्या अनुपात का तुलनात्मक आकलन किया गया। अब फील्ड मैपिंग के माध्यम से गांवों की वास्तविक भौगोलिक स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है।

मैपिंग के दौरान एक गांव से दूसरे गांव के बीच आवागमन की सुविधा, नाला, नहर, पइन सहित अन्य भौगोलिक एवं संपर्क संबंधी तथ्यों का भी आकलन किया जा रहा है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिसीमन के दौरान किस गांव को किस पंचायत में शामिल करना, वहां के लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक होगा।

एक गांव या टोले के नौ स्थानों की हो रही मैपिंग

मोबाइल एप्लीकेशन से होने वाली मैपिंग में सामान्य तस्वीर लेने के बजाय प्रत्येक निर्धारित इकाई के सटीक भौगोलिक निर्देशांक दर्ज किए जा रहे हैं। फील्ड कर्मी संबंधित स्थान पर पहुंचकर मोबाइल का जीपीएस ऑन करेंगे और एप्लीकेशन पर क्लिक कर लोकेशन दर्ज करेंगे।

प्रत्येक गांव या टोले के लिए कुल नौ प्रमुख लोकेशन प्वाइंट निर्धारित किए गए हैं। इनमें उत्तर,दक्षिण, पूरब और पश्चिम दिशा के अलावा मध्य भाग तथा उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम,दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशा के चारों कोने शामिल हैं।

इससे संबंधित क्षेत्र का डिजिटल भौगोलिक रिकॉर्ड तैयार होगा और पंचायत की सीमा निर्धारित करने में सहूलियत मिलेगी। काम को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए प्रखंड स्तर पर विभिन्न विभागों के कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है।

कार्यपालक सहायक, पंचायत सचिव और आवास सहायकों को फील्ड में लगाया गया है। इनके माध्यम से गांव-टोलों की लोकेशन दर्ज करने के साथ ही परिसीमन के लिए जरूरी भौगोलिक सूचनाएं जुटाई जा रही हैं।

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