बिहार में बाल हृदय योजना का दायरा बढ़ा, सभी उम्र के लोग करा सकेंगे दिल के छेद का फ्री इलाज
पहले मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना केवल 0-18 वर्ष के बच्चों के लिए थी, अब इसका दायरा बढ़ाकर 18 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों को भी निःशुल्क इलाज मिलेगा।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
योजना का दायरा बढ़ा, वयस्कों को भी मिलेगा निःशुल्क इलाज।
दिल में छेद का इलाज अब सरकारी खर्च पर मुफ्त।
कटे होंठ, पैर मुड़े होने जैसी बीमारियों का भी मुफ्त इलाज।
जागरण संवाददाता, अरवल। दिल में छेद की बीमारी से जूझ रहे बच्चों और अब वयस्कों के लिए राहत की खबर है। पहले मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना का लाभ केवल 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को मिलता था।
अब सरकार ने इसका दायरा बढ़ाते हुए 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को भी दिल में छेद के इलाज की सुविधा देने का निर्णय लिया है। ऐसे मरीज जिला समन्वयक से संपर्क कर योजना के तहत फ्री ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत सरकारी खर्च पर फ्री ऑपरेशन कराया जा रहा है। वर्ष 2022 से अब तक जिले के 18 बच्चों का गुजरात के अहमदाबाद में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कराया जा चुका है। वहीं, तीन बच्चे ऑपरेशन की कतार में हैं।
बिना खर्च के होता है इलाज
खास बात यह है कि जिस बीमारी के इलाज में निजी अस्पतालों में करीब चार लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं, उसका इलाज सरकार की ओर से पूरी तरह मुफ्त कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल हेल्थ टीम आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती है। इस दौरान दिल में छेद समेत अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान की जाती है।
इसके बाद बच्चों की जांच सदर अस्पताल में कराई जाती है। बीमारी की पुष्टि होने पर पटना में विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराई जाती है। ऑपरेशन की आवश्यकता होने पर बच्चे को उपचार के लिए अहमदाबाद भेजा जाता है।
अब पटना स्थित मेदांता अस्पताल में भी ऐसे ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो गई है।जिला समन्वयक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि छह वर्ष तक के बच्चों के साथ इलाज के दौरान माता-पिता दोनों को भेजा जाता है।
वहीं, छह से 18 वर्ष तक के किशोरों के साथ माता या पिता में से किसी एक को भेजने की व्यवस्था है। ऑपरेशन के बाद सरकार की ओर से छह माह तक जांच की सुविधा भी फ्री उपलब्ध कराई जाती है।
पैर मुड़ने और कटे होंठ का भी मुफ्त इलाज
आरबीएसके टीम केवल हृदय रोग की पहचान तक सीमित नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जांच के दौरान पैर मुड़े होने, तालू कटे होने और कटे होंठ जैसी जन्मजात समस्याओं से पीड़ित बच्चों की भी पहचान की जाती है। इसके बाद उनका भी सरकारी खर्च पर उपचार कराया जाता है।
