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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 07, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

10 जुलाई तक अच्छी वर्षा की संभावना नहीं, तैयार धान के बिचड़े बचाना चुनौती

By JagranEdited By:
Published: Thu, 07 Jul 2022 10:02 PM (IST)

गोपालगंज वर्षा की राह देख रहे किसानों का इंतजार अभी समाप्त होता नहीं दिख रहा। वर्षा की स

10 जुलाई तक अच्छी वर्षा की संभावना नहीं, तैयार धान के बिचड़े बचाना चुनौती
10 जुलाई तक अच्छी वर्षा की संभावना नहीं, तैयार धान के बिचड़े बचाना चुनौती

गोपालगंज : वर्षा की राह देख रहे किसानों का इंतजार अभी समाप्त होता नहीं दिख रहा। वर्षा की संभावना कम होने से किसानों की मुसीबत लगातार बढ़ रही है। कृषि विश्वविद्यालय पूसा के कृषि मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान के अनुसार, 10 जुलाई तक जिला समेत उत्तर बिहार में अच्छी वर्षा की कोई संभावना नहीं दिख रही है। पूर्वानुमान के अनुसार, हल्के-फुल्के बादल आसमान में छाए रहेंगे पर न तो वर्षा की कोई उम्मीद है और ना ही गर्मी से निजात मिलने की संभावना। ऐसे में किसानों के सामने रोपे गए धान के पौधे और नर्सरी में तैयार धान के बिचड़े को बचाना बड़ी चुनौती है। विदित हो कि पिछले सप्ताह मानसून के सक्रिय होने के बाद अचानक कमजोर पड़ जाने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। जिन किसानों ने अपने निजी साधनों से थोड़ी बहुत धान की रोपनी कर ली है, उनके धान के पौधे तो सूख ही रहे हैं। जिन किसानों ने अपनी नर्सरी में धान के बिचड़े तैयार कर रखे हैं, रोपनी नहीं किए जाने से उन बिचड़ों को बचाना भी बड़ी समस्या है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतम 30 दिन के धान के बिचड़ों की रोपनी खेतों में कर ली जानी चाहिए। वर्षा नहीं होने से धान की रोपनी की रफ्तार अचानक थम गई है। किसान आसमान में टकटकी लगाए हैं कि कब वर्षा हो और वह धान की रोपनी कर सकें। इसके साथ ही जहां धान के पौधे की रोपनी कर ली गई है,वहां उन्हें सूखने से बचाना भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में तमाम किसान अब रोपनी वाले खेतों में पंपसेट से सिचाई कर धान के पौधों को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।

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गर्मी से राहत की संभावना नहीं

जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 10 जुलाई तक अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। ऐसे में लोगों को गर्मी और उमस से भी राहत मिलने की कोई संभावना नहीं दिखती।

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खेतों में सिचाई की व्यवस्था करें किसान : कृषि विज्ञानी

कृषि विज्ञान केंद्र, सिपाया के वरिष्ठ कृषि विज्ञानी डा. पृथ्वीराज डे ने बताया कि वर्षा की संभावना कम होने पर किसानों के सामने रोपनी किए गए धान के पौधे और तैयार बिचड़े दोनों को बचाने की चुनौती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि किसी भी तरह रोपनी किए गए खेतों में सिचाई की व्यवस्था करें। ताकि धान के पौधों को सूखने से बचाया जाए। इसके साथ ही नर्सरी में तैयार बिचड़ों को भी बचाना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बिचड़ों में सिचाई के साथ यूरिया और पोटाश के छिड़काव से सूखने और पीले पड़ने से बचाया जा सकता है। कृषि विज्ञानी ने यह भी सलाह दी की 20 से 30 दिन के बिचड़े ही रोपनी के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होते हैं। 30 दिन से अधिक के बिचड़े रोपाई के बाद विस्तार नहीं पाते। इससे उत्पादन कम हो सकता है। ऐसे में किसान तैयार बिचड़ों की निश्चित तौर पर रोपनी कर लें।

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अभी तक अच्छी वर्षा नहीं होने से धान की रोपनी 20 प्रतिशत भी नहीं हो पाई है। नहरों में पानी नहीं होने और नलकूप चालू हालत में नहीं होने से जो भी धान की रोपनी हुई है, वह निजी पंपसेट से ही हो पाई है। वर्षा नहीं होने से रोपे गए धान के पौधे भी अब सूखने लगे हैं। ऐसे में हमारी परेशानी लगातार बढ़ रही है।

सुरेश राय, किसान

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पिछले वर्ष अतिवृष्टि के चलते धान की फसल में भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उम्मीद थी कि इस बार मानसून समय से सक्रिय होगा और धान के समय पर रोपनी कर अच्छा उत्पादन लेंगे। वर्षा नहीं होने से अब हौसला टूटने लगा है।

संजय राय, किसान