गोपालगंज : मां दुर्गा की पांचवीं शक्ति स्कंदमाता की पूजा-अर्चना को गुरुवार को जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में मौजूद दुर्गा मंदिरों में पूजा-अर्चना को लोग पहुंचे। इस दौरान भक्तों ने देवी के पांचवे स्वरूप की उपासना कर आशीष मांगा। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर का पट आम लोगों के बंद होने कारण यहां काफी कम संख्या में लोग पहुंचे। थावे पहुंचे भक्तों ने मंदिर परिसर से ही माता की पूजा अर्चना की।

कोरोना के कारण ऐतिहासिक थावे दुर्गा मंदिर तथा लछवार स्थित दुर्गा मंदिर के पट आम लोगों के लिए बंद किए जाने के बाद भी थावे मंदिर परिसर में भक्त पहुंचे। लोगों ने इस बीच मंदिर के परिसर में ही माता की पूजा अर्चना की। कुछ लोग दुर्गा मंदिर के प्रवेश व निकास द्वार पर भी पूजा अर्चना में लगे रहे। अलावा इसके जिला मुख्यालय के दुर्गा मंदिर, बरौली के नकटो भवानी मंदिर, घोड़ा घाट मंदिर जलालपुर स्थित दुर्गा मंदिर एवं हीरमती रानी मंदिर में भी पूजा अर्चना को काफी संख्या में लोग पहुंचे। प्रखंड क्षेत्र के सिधवलिया, महम्मदपुर सहित विभिन्न दुर्गा मंदिरों में लोगों की भीड़ लगी रही। सुबह से ही मंदिरों में लोगों की कतारें लग गई। देवीगंज मंदिर के पुजारी ने मां दुर्गा के पांचवी स्वरूप स्कंदमाता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भगवान स्कंद की माता होने से ही इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण मान्यता है कि उनकी छवि पूरे ब्रह्माण्ड में दैदीप्यमान होती रहती है। भगवान स्कंद बाल रूप में इस देवी के गोद में बैठे हैं, जिन्हें देवताओं का सेनापति कहा जाता है। मां स्कंदमाता सिंह पर विराजमान हैं। इनका ध्यान हमारे जीवन को पवित्र व निष्पाप बनने की प्रेरणा देता है।

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