गोपालगंज। बिना गुनाह किए कैदी मां के साथ जेल में रह रहे बच्चों को बुनियादी सुविधा उपलब्ध करने की दिशा में पहल की गई है। इस पहल के तहत महिला कैदी के साथ जेल में रह रहे उनके बच्चों को प्रोटीनयुक्त भोजन दिया जाएगा। इन बच्चों के स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा की भी बेहतर व्यवस्था की जाएगी। इन बच्चों के लिए खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही लंबे समय से जेल में बंद महिला कैदियों में अवसाद के कारण उत्पन्न तनाव को दूर करने के लिए भी पहल की गई है। इसके लिए चनावे मंडलकारा में दस दिवसीय शिविर लगाया गया है। बिहार राज्य लीगल सेवा प्राधिकार के गाइड लाइन के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वाधान में 27 मई तक चलने वाले इस शिविर में पैनल अधिवक्ता, मनोचिकित्सक, महिला चिकित्सक, स्वयंसेवी संस्थान के सदस्य आदि महिला कैदियों के समक्ष आने वाली समस्याओं को दूर कर उन्हें तनाव से मुक्त करने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही महिला कैदियों को रोजगार परक प्रशिक्षण लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। ताकि एक तो इनका मन लगा रहे तथा दूसरे जेल से छूटने के बाद ये अपना काम धंधा शुरू कर सकें। इस संबंध में जेल अधीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि यह शिविर जेल में बंद विचाराधीन तथा और सजायाफ्ता महिला कैदी तथा उनके साथ बिना गुनाह के बंद उनके बच्चे को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने तथा उनके स्वास्थ व भविष्य को देखते हुए आयोजित किया गया है। इस शिविर में पैनल अधिवक्ता, मनोचिकित्सक, महिला चिकित्सक, स्वयंसेवी संस्थान सदस्य शामिल हैं। शिविर के माध्यम से जेल में महिला कैदियों के साथ हो रहे व्यवहार और भेदभाव को दूर करने, आम कैदियों की तरह उनके साथ व्यवहार हो, साफ सफाई, डिप्रेशन की शिकार महिलाओं को मनोवैज्ञानिक से सलाह, गर्भवती महिलावो को विटामिन युक्त भोजन तथा रिहा होने के बाद महिला कैदी स्वरोजगार कर सकें, इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जेल में 17 महिला कैदी हैं। कुछ के साथ उनके छोटे बच्चे भी बिना गुनाह के जेल में रह रहे हैं। शिविर में अधिवक्ता कुमारी प्रतिभा, सोनिया सक्सेना , लीगल एडवाइजर राजीव कुमार तथा जेल के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

By Jagran