जिंदा 3 लाख, मौत के बाद 8 लाख; साउथ अफ्रीका में फंसा बिहार के युवक का शव... मां बोली- मेरे बच्चे को कोई ला दो
गोपालगंज के सुनेश राम की अंगोला में मौत हो गई है। परिवार का आरोप है कि बीमारी के दौरान भारत ...और पढ़ें

बेटे को आखिरी बार देखने के लिए बेबस मां की गुहार
HighLights
गोपालगंज के सुनेश राम की अंगोला में दुखद मौत।
बीमारी में वापसी और शव लाने के लिए पैसों की मांग।
बेबस परिवार ने सरकार से मदद की गुहार लगाई।
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। गोपालगंज के भीतभेरवा गांव के एक परिवार के लिए विदेश में रोजगार का सपना अब गहरे दुख में बदल गया है। 40 वर्षीय सुनेश राम की अंगोला में मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि बीमार होने पर सुनेश ने भारत लौटने की इच्छा जताई थी, लेकिन कंपनी की ओर से घर भेजने के लिए कथित तौर पर ढाई से तीन लाख रुपये मांगे गए। अब उनकी मौत के बाद पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए आठ लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया जा रहा है।
बेटे को आखिरी बार देखने के लिए बेबस मां की गुहार
सुनेश की मौत की खबर मिलने के बाद उनकी मां लाखपति देवी, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की सबसे बड़ी चिंता अब बेटे का पार्थिव शरीर अपने गांव लाकर अंतिम संस्कार करने की है। मां की गुहार है कि सरकार हस्तक्षेप कर उनके बेटे का शव भारत पहुंचाने में मदद करे।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। ऐसे में आठ लाख रुपये जुटाना उनके लिए बेहद मुश्किल है। परिजन सांसद, जिलाधिकारी और सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं, ताकि सुनेश का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में हो सके।
तबीयत बिगड़ने पर घर लौटना चाहते थे सुनेश
मृतक के भाई राजेश राम के अनुसार, सुनेश करीब पांच से छह महीने पहले रोजगार की तलाश में गुजरात के अहमदाबाद गए थे।
वहां उन्होंने एजेंट राजेश पटेल के माध्यम से टॉप इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड में वेल्डर के पद पर काम पाने के लिए साक्षात्कार दिया था। बाद में उन्हें रोजगार के लिए अंगोला भेज दिया गया।
परिजनों का कहना है कि विदेश में काम करने के दौरान सुनेश के सिर में तेज दर्द रहने लगा और उनकी तबीयत बिगड़ गई।
उन्होंने कंपनी प्रबंधन से इलाज कराने और भारत लौटने की इच्छा जताई थी। परिवार का आरोप है कि घर भेजने के लिए ढाई से तीन लाख रुपये की मांग की गई, जिसे वे पूरा नहीं कर सके।
इलाज और वापसी को लेकर कंपनी पर गंभीर आरोप
सुनेश के भतीजे अमित कुमार का आरोप है कि कंपनी में खाने और चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं थी। उनके मुताबिक, सुनेश की तबीयत खराब होने पर भी इलाज और भारत वापसी के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। परिवार का दावा है कि बीमारी के दौरान सुनेश ने घर लौटने की बात कही थी।
हालांकि, कंपनी पर लगाए गए आरोपों और सुनेश की मौत के वास्तविक कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कंपनी का पक्ष, चिकित्सा रिकॉर्ड और संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।
मौत की खबर भी कंपनी से नहीं, साथी मजदूरों से मिली
परिजनों के अनुसार, सुनेश की मौत की जानकारी उन्हें कंपनी की ओर से नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले अन्य भारतीय श्रमिकों के फोन से मिली।
परिवार का कहना है कि मौत के बाद जब उन्होंने शव भारत भेजने की व्यवस्था के बारे में पूछा, तो कथित तौर पर आठ लाख रुपये का खर्च बताया गया।
इस मांग ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे स्वजन के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना संभव नहीं हो पा रहा है। अब वे प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर शव वापस लाने की व्यवस्था कराने की मांग कर रहे हैं।
छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
सुनेश राम अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। परिवार के लिए यह सिर्फ कमाने वाले सदस्य को खोने का दुख नहीं, बल्कि उनके अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की चिंता भी है। गांव में स्वजन और परिचित इस घटना से सदमे में हैं।
परिजनों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और जिलाधिकारी से मदद की अपील की है। उनकी मांग है कि पूरे मामले की जांच हो, कंपनी से लगाए गए आरोपों पर जवाब लिया जाए और सुनेश का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने के लिए जरूरी समन्वय किया जाए।
