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मां का साया उठा, फिर भी नहीं टूटा हौसला; गोपालगंज की पारुल बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

Published: Wed, 12 Aug 2026 05:33 PM (IST)

कुचायकोट प्रखंड की पारुल राय ने अपनी मेहनत और लगन से असिस्टेंट प्रोफेसर का पद हासिल किया है। उन्होंने जयप्रकाश ...और पढ़ें

पारुल राय

पारुल राय

HighLights

  1. पारुल राय ने असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर गांव का नाम रोशन किया।

  2. उन्होंने जयप्रकाश विश्वविद्यालय के पंचदेवरी कॉलेज में इतिहास पढ़ाना शुरू किया।

  3. मां के निधन के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति से सफलता हासिल की।

संवाद सूत्र, कुचायकोट (गोपालगंज)। कुचायकोट प्रखंड के ढेबवां गांव की बेटी पारुल राय ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का गौरव हासिल किया है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्होंने जयप्रकाश विश्वविद्यालय के राजकीय डिग्री महाविद्यालय पंचदेवरी में इतिहास विभाग में योगदान दिया। उनकी इस उपलब्धि से गांव से लेकर पूरे प्रखंड में खुशी का माहौल है।

गांव की पढ़ाई से शुरू हुआ सफलता का सफर

पारुल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही पूरी की। इसके बाद कसया से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की।

आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की और प्रयागराज विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की।

मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति बनी सफलता की कुंजी

पारुल ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद तक पहुंचने के लिए लगातार मेहनत की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय दृढ़ इच्छाशक्ति, कठिन परिश्रम और माता-पिता के आशीर्वाद को दिया।

उनका कहना है कि लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास से सफलता हासिल की जा सकती है।

पिता डाकघर में पोस्टमास्टर, मां का निधन

पारुल के पिता संजय कुमार राय ढेबवां गांव स्थित डाकघर में पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी मां शशि राय गृहिणी थीं, जिनका पिछले वर्ष निधन हो गया।

पारुल की सफलता में परिवार के सहयोग और माता-पिता के आशीर्वाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

बेटी की उपलब्धि पर गांव में खुशी

पारुल के असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की खबर मिलते ही ढेबवां गांव में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनकी उपलब्धि को गांव की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया जा रहा है।

पंचदेवरी कॉलेज में शुरू किया अध्यापन

चयन के बाद पारुल राय ने जयप्रकाश विश्वविद्यालय के राजकीय डिग्री महाविद्यालय पंचदेवरी में इतिहास विभाग में योगदान किया।

गांव की गलियों से निकलकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मुकाम हासिल करने वाली पारुल अब विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ाएंगी।

उनकी सफलता ने परिवार के साथ-साथ पूरे कुचायकोट प्रखंड को गौरवान्वित किया है।