खेल-खेल में पढ़ाई को बनाया रोचक, राष्ट्रपति मुर्मू के हाथों सम्मानित होंगी बिहार की 'सुपर टीचर' पुष्पा
गोपालगंज की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद को सीमित संसाधनों में नवाचार और गतिविधि आधारित शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है।

खेल-खेल में पढ़ाई को बनाया रोचक, राष्ट्रपति मुर्मू के हाथों सम्मानित होंगी बिहार की 'सुपर टीचर' पुष्पा
HighLights
सीमित संसाधनों में नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित।
बालिका शिक्षा, अभिभावक सहभागिता पर विशेष जोर दिया।
मनोज कुमार राय, कुचायकोट (गोपालगंज)। बिहार के गोपालगंज स्थित गंडक नदी के तटवर्ती क्षेत्र के राजकीय कन्या मध्य विद्यालय, कुचायकोट की शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने सीमित संसाधनों के बीच नवाचार और गतिविधि आधारित शिक्षा से बच्चों में सीखने की ललक पैदा की।
शिक्षण कार्य में नवाचार, बालिका शिक्षा, अभिभावकों की सहभागिता और विद्यालय को समुदाय से जोड़ने के प्रयास ने उनको प्रसिद्धि भी दिलाई।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए देशभर से 48 शिक्षकों का चयन किया है, जिनमें पुष्पा प्रसाद का भी नाम है।
उनको राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शिक्षक दिवस (पांच सितंबर) के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सम्मानित करेंगी।

फोटो- अभिभावकों को सम्मानित करतीं शिक्षिका पुष्पा प्रसाद। सौजन्य : विद्यालय प्रबंधन
पुष्पा ने मूलभूत साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को शिक्षण का आधार बनाते हुए स्थानीय और कम लागत वाली सामग्री से शिक्षण अधिगम साम्रगी तैयार की। फ्लैश कार्ड, रोल प्ले, कठपुतली, पेंटिंग और क्राफ्ट जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा।
जटिल विषयों को समझाने के लिए वर्चुअल रियलिटी आधारित 3-डी वीडियो तथा विद्यालय परिसर के पेड़ों पर क्यूआर कोड आधारित सीखने की व्यवस्था की। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उत्साह बोर्ड बनाया, जिस पर अब तक 50 से अधिक बच्चे स्थान बना चुके हैं।
अभिभावकों को बनाया शिक्षा का सहभागी
पुष्पा प्रसाद ने मासिक शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी के साथ वर्ष 2025 में निपुण अभिभावक सम्मान शुरू किया। शत-प्रतिशत नामांकन, स्वच्छता, नशामुक्ति और बाल विवाह निषेध जैसे अभियानों में भी बच्चों व अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की।
बेहतर सहयोग करने वाले अभिभावकों को जिला शिक्षा पदाधिकारी के हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाता है।
बालिकाओं के स्वास्थ्य पर भी जोर
पुष्पा ने स्कूल में बालिकाओं को शारीरिक-मानसिक बदलावों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक किया। विद्यालय में पैड बैंक की स्थापना कर निश्शुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध कराया जाता है। घर में उपलब्ध सामग्री से सेनेटरी पैड बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समावेशी शिक्षा पर भी जोर दिया गया।
धूप में स्कूल में बच्चों की उपस्थिति न घटे, बांटे छाते
गर्मी में तेज धूप के कारण बच्चों की उपस्थिति प्रभावित न हो, इसके लिए उन्होंने अपने निजी खर्च से छाते वितरित किए। इससे बच्चों की नियमितता और विद्यालय की गतिविधियों में सहभागिता बढ़ी।
2006 में शुरू किया शिक्षण का सफर
पुष्पा प्रसाद मूलरूप से पटना जिले के पंडारा गांव की निवासी हैं। वर्ष 2006 में पंचायत शिक्षिका के रूप में मध्य विद्यालय बलिवन सागर से शिक्षण कार्य शुरू किया। वर्ष 2013 से वह कुचायकोट कन्या विद्यालय में कार्यरत हैं। उनके पति बाल्मीकि प्रसाद वर्ष 1999 बैच के बीपीएससी शिक्षक हैं और वर्तमान में मध्य विद्यालय कुचायकोट के प्रधान शिक्षक हैं।
पहले भी मिल चुके हैं सम्मान
वर्ष 2024 में राजकीय शिक्षक सम्मान के अलावा उन्हें ‘टीचर ऑफ द मंथ’, निपुण शिक्षक सम्मान और जिलास्तरीय उत्कृष्ट सेवा सम्मान मिल चुका है।
शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ने कहा कि बच्चों को उनकी रुचि के अनुरूप खेल, चित्रकला और रचनात्मक गतिविधियों से पढ़ाया जाए तो वे सीखने के प्रति अधिक आकर्षित होते हैं। खेल-खेल में शिक्षा से बच्चों की उपस्थिति और सीखने की क्षमता में सुधार आता है।
शिक्षक रामबाबू कुमार प्रसाद का कहना है कि सीमित संसाधनों में पुष्पा प्रसाद के नवाचार से विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति, रुचि और सहभागिता बढ़ी है। उनका राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयन पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है।
वहीं, शिक्षिका सुषमा कुमार ने कहा कि पुष्पा प्रसाद ने शिक्षण को किताबों तक सीमित न रखकर बच्चों की रुचि और जरूरत के अनुसार नई गतिविधियों को अपनाया। पर्यावरण, सामाजिक जागरूकता और किशोरियों से जुड़े कार्यों में उनकी पहल सराहनीय रही है।
