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गोपालगंज में स्वरोजगार का सपना अधूरा: 15 साल से बंद 39 दुकानें, नहीं हुआ आवंटन; शटर जंग खा रहे

Published: Thu, 25 Jun 2026 12:50 PM (IST)

गोपालगंज के कुचायकोट में स्वरोजगार के लिए बनी 39 दुकानें 15 साल से बंद पड़ी हैं, जिससे गरीबों का आत्मनिर्भर बनने का सपना अधूरा रह गया है।

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HighLights

  1. कुचायकोट में 39 दुकानें 15 साल से बंद पड़ी हैं।

  2. स्वरोजगार योजना के तहत 45 लाख में बनी थीं ये दुकानें।

  3. प्रशासनिक लापरवाही से गरीबों का स्वरोजगार सपना अधूरा।

मनोज कुमार राय, कुचायकोट (गोपालगंज)। गरीब परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से करीब 15 वर्ष पूर्व निर्मित 39 दुकानें आज भी आवंटन की प्रतीक्षा में बंद पड़ी हैं।

कुचायकोट प्रखंड मुख्यालय परिसर में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई) के तहत वर्ष 2010-11 में लगभग 45 लाख रुपये की लागत से इन दुकानों का निर्माण कराया गया था। लेकिन विभागीय उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण निर्माण के डेढ़ दशक बाद भी एक भी दुकान किसी पात्र लाभुक को आवंटित नहीं की जा सकी है।

परिणामस्वरूप सरकारी धन से निर्मित यह परिसंपत्ति धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है और स्वरोजगार का सपना अधूरा रह गया है। योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों, विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों को रोजगार का स्थायी साधन उपलब्ध कराना था।

इसी सोच के तहत तीन अलग-अलग श्रेणियों में 39 दुकानों का निर्माण कराया गया था। यदि समय पर आवंटन हो जाता तो कम से कम 39 परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता, जबकि कई अन्य लोगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचता।

समय के साथ रखरखाव के अभाव में दुकानों की स्थिति खराब होती चली गई। कई दुकानों के शटर जंग खाकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, फर्श उखड़ने लगे हैं और भवनों में जर्जरता के स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से बंद पड़ी इन दुकानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो सरकारी धन से निर्मित यह पूरी परिसंपत्ति बेकार हो सकती है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने एसजीएसवाई योजना का पुनर्गठन कर इसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में शामिल कर दिया था। योजना का स्वरूप बदलने के बाद दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया फाइलों में ही सिमटकर रह गई।

बताया जाता है कि जिला परिषद कार्यालय से लेकर प्रखंड कार्यालय तक इस संबंध में कोई स्पष्ट संचिका उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बाद में पदभार संभालने वाले अधिकारियों के लिए भी मामले को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो सका।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई बार जिला प्रशासन को पत्र भेजकर दुकानों के आवंटन अथवा उनके वैकल्पिक उपयोग को लेकर ठोस निर्णय लेने की मांग की है। इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हो सकी है। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और परिसंपत्तियों के उपयोग पर भी सवाल उठने लगे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

प्रखंड विकास पदाधिकारी सुनील कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2010-11 में एसजीएसवाई योजना के तहत 39 दुकानों का निर्माण कराया गया था। फिलहाल प्रखंड कार्यालय में इससे संबंधित कोई संचिका या विस्तृत अभिलेख उपलब्ध नहीं है।

उप विकास आयुक्त द्वारा मामले में रिपोर्ट मांगी गई है। आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है तथा शीघ्र ही विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर उप विकास आयुक्त कार्यालय को भेज दिया जाएगा।

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