गोपालगंज। शुक्रवार को जिला मुख्यालय से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक के मस्जिदों में पहले जुम्मे की नमाज अदा की गई। नमाज को देखते हुए सभी मस्जिदों में काफी भीड़ देखी गई। नमाज को देखते हुए मस्जिद तथा आसपास के इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। नमाज समाप्त होने के बाद जब नमाजी मस्जिदों से बाहर निकलने को कुछ देर के लिए शहर की सड़कों पर काफी भीड़ जमा हो गई। जिसके कारण कुछ देर के लिए यातायात प्रभावित हुआ।

नमाज अदा करने के बाद जंगलिया मस्जिद के इमाम ने कहा कि यह रमजान शरीफ का महीना है जो रहमत मगफिरत और जहन्नम से निजात का माह है। इस्लाम की बुनियाद ही पांच चीजों पर कायम है। पहला कलमा पढ़ना, दूसरा नमाज तीसरा रमजान में रोजे रखे जाएं, चौथा जकात अदा की जाए और अंतिम मालदार मुसलमान हज जरूर करें। उन्होंने कहा कि यह बातें तमाम मुसलमान मर्द, औरतों के लिए है। रोजे का शबाब हासिल करने के लिए मर्द व औरत बराबर के हकदार हैं। लेकिन देखा जाता है कि मुसलमान महिलाएं रोजा तो रखतीं हैं, लेकिन नमाज पढ़ने में पीछे रह जाती हैं। दिन भर अपने घरेलू काम-काज में उलझी रहती हैं। वे कुरान मजीद की तिलावत से महरूम रह जाती हैं। मुस्लिम रोजेदार महिला को कम-से-कम रमजान शरीफ में ज्यादा-से-ज्यादा कुरान की तिलावत में अपना वक्त देना चाहिए। झूठ-चुगली से दूर रहें यही रोजा की असली रुह है। उन्होंने कहा कि प्यारे नवी हजरत सल्लाह अलैह वसल्लम के साथी की तमन्ना रहती थी कि पूरा का पूरा साल रमजान हो जाए तो कितना अच्छा होता। लेकिन आज का मुसलमान, उसी नवी को मानने वाले, उसी कुरान शरीफ पर ईमान रखने वाले यह चाहते हैं कि रमजान का महीना नहीं होता तो कितना अच्छा होता। भूखा-प्यासा रहने से क्या लाभ? प्यारे नवी की एक हदीश में है कि रोजा रखो और स्वस्थ्य रहो। रोजे की हालत में दिन भर कुछ खाने-पीने की हलाल चीजों को छोड़ना पड़ता है। रोजा रखने वाले हर मुसलमान को इससे सीख मिलती है कि पूरी ¨जदगी हराम और बुरे कामों से दूर रहो।

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