एम्स की नौकरी छोड़ गांव लौटे गाेपालगंज के डॉक्टर, अब घर-घर सिखा रहे जिंदगी बचाने का हुनर
एम्स छोड़कर अपने गृह जिले गोपालगंज लौटे डॉ. अभिषेक रंजन अब लोगों को इलाज के साथ-साथ जीवन बचाने का हुनर, यानी सीपीआर, सिखा रहे हैं।

आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देते डाॅ. अभिषेक रंजन। सौ : स्वयं
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में चिकित्सक के रूप में सेवा देने के बाद अपने गृह जिले के लोगों के बीच लौटे अभिषेक रंजन अब इलाज के साथ-साथ लोगों को जीवन बचाने का हुनर भी सिखा रहे हैं।
बरौली स्थित अपने आवास से चिकित्सा सेवा देने के साथ शहर के कालेज रोड में निजी क्लिनिक चलाने वाले डाॅ. अभिषेक रंजन अब गांव-गांव जाकर लोगों को CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
अचानक हृदय रुकने या सांस बंद होने जैसी आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में अस्पताल या एंबुलेंस के पहुंचने से पहले आसपास मौजूद व्यक्ति यदि सही तरीके से सीपीआर दे सके तो मरीज को तत्काल जीवनरक्षक सहायता मिल सकती है।
इसी सोच के साथ डाॅ. अभिषेक ने सीपीआर प्रशिक्षण को अस्पतालों और शहरों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास शुरू किया है।
पदाधिकारी-कर्मियों से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों तक को प्रशिक्षण
जिला प्रशासन के सहयोग से डा. अभिषेक रंजन सरकारी पदाधिकारियों और कर्मियों को भी सीपीआर का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं और ममता को भी आपात स्थिति में मरीज को प्राथमिक सहायता देने के तरीके बताए गए हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आपात स्थिति में मरीज की पहचान करने, सीपीआर की सही प्रक्रिया अपनाने और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के बारे में जानकारी दी जाती है।
उद्देश्य यह है कि किसी आकस्मिक स्थिति में प्रशिक्षित व्यक्ति घबराने के बजाय शुरुआती स्तर पर सही कदम उठा सके।
गांवों में युवाओं को जीवनरक्षक तकनीक सिखाने पर जोर
डाॅ. अभिषेक का मानना है कि किसी आपात स्थिति में मरीज के लिए एंबुलेंस या चिकित्सक के पहुंचने तक का समय बेहद अहम होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल तक पहुंचने में कई बार समय लग जाता है। ऐसे में यदि आसपास के लोगों को प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी हो तो वे चिकित्सकीय मदद मिलने तक मरीज की स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसी उद्देश्य से वह अलग-अलग गांवों और संस्थानों में प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। उनका जोर विशेष रूप से ग्रामीणों, युवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों को सीपीआर की जानकारी देने पर है, ताकि किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने, सांस बंद होने या हृदय रुकने जैसी स्थिति में शुरुआती मदद तुरंत मिल सके।
एम्स की नौकरी से गृह जिले में सेवा तक का सफर
एम्स जैसे संस्थान में चिकित्सक की नौकरी करने के बाद गृह जिले में लौटना अभिषेक रंजन के लिए केवल निजी चिकित्सा सेवा तक सीमित रहने का फैसला नहीं था।
उन्होंने चिकित्सा ज्ञान को समुदाय तक पहुंचाने को भी अपनी सेवा का माध्यम बनाया। निजी क्लिनिक में मरीजों का उपचार करने के साथ गांवों में जाकर लोगों को सीपीआर सिखाने की उनकी पहल इसी सोच का हिस्सा है।
उनका प्रयास है कि जिले के अधिक से अधिक ग्रामीण, युवा, स्वास्थ्यकर्मी और आम नागरिक इस जीवनरक्षक तकनीक से परिचित हों। ताकि आपात स्थिति में चिकित्सक या एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही किसी की जिंदगी बचाने के लिए जरूरी कदम उठाया जा सके।
