गोपालगंज। गंडक नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच नदी के जलप्रवाह को सामान्य बनाए रखने के लिए बुधवार की रात नदी पर बनाए गए सत्तरघाट पुल के एप्रोच पथ को पूर्व से चिन्हित किए गए तीन स्थानों पर काट दिया गया। तीनों स्थानों पर वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी के सहारे एप्रोच पथ को काटने का कार्य कराया गया। जिसके बाद नदी का पानी काटे गए एप्रोच पथ के सहारे बहने लगा।

जानकारी के अनुसार बैकुंठपुर प्रखंड के फैजुल्लाहपुर घाट से पूर्वी चंपारण के केसरिया के बीच गंडक नदी पर बने सत्तर घाट पुल के पहुंच पथ में 810 मीटर लंबाई में कुल तीन स्थानों पर छोटे पुल बनाने का निर्णय लिया गया था। ताकि नदी का जलप्रवाह पूर्व की भांति होता रहे। निर्णय के बावजूद इस साल छोटे पुल को बनाने का कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका। इस साल गंडक नदी में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज लेबल पहुंचने के बाद नदी के पानी का जलप्रवाह कायम रखने के लिए पुल के लिए तीनों चिन्हित स्थानों पर एप्रोच पथ को काटने का निर्णय जिलाधिकारी ने लिया। पथ काटने के पूर्व डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने पथ निर्माण विभाग व बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के साथ मंथन भी किया। डीएम के निर्देश के बाद बुधवार की रात ही वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में पुल के लिए चिन्हित तीनों स्थान पर एप्रोच पथ को काटकर नदी के पानी को रास्ता दे दिया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि एप्रोच पथ कटने के बाद नदी के बहाव में किसी भी तरह की बाधा नहीं आएगी। साथ ही तटबंध पर गंडक नदी के दबाव भी कम होगा। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष बरसात के पूर्व तीनों पुलों को निर्माण कार्य एप्रोच पथ पर किया जाएगा। पुल के लिए चिन्हित स्थानों पर पथ काटने के बाद सत्तर घाट पुल के रास्ते वाहनों का आवागमन बंद हो गया। इन वाहनों को अब बंगरा घाट पुल के रास्ते डाइवर्ट किया गया है।

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