विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एम्स की नौकरी छोड़ी और बिहार के गांव-गांव पहुंचने लगे डॉक्टर अभिषेक... क्या है इस अनोखे मिशन के पीछे की कहानी?

Published: Tue, 15 Sep 2026 05:03 PM (IST)

डॉ. अभिषेक रंजन ने एम्स की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर अपने गृह जिले गोपालगंज में लोगों की सेवा करने का निर्णय ...और पढ़ें

गांव की चौपाल तक पहुंची जिंदगी बचाने की मुहिम

गांव की चौपाल तक पहुंची जिंदगी बचाने की मुहिम

HighLights

  1. एम्स की नौकरी छोड़ डॉ. अभिषेक रंजन गोपालगंज में सेवा दे रहे।

  2. ग्रामीणों, युवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दे रहे।

  3. आपात स्थिति में जीवन बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे।

रजत कुमार, गोपालगंज। एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में चिकित्सक की नौकरी छोड़ गृह जिले के लोगों की सेवा को प्राथमिकता देना अपने आप में मिसाल है। गोपालगंज के चिकित्सक डा. अभिषेक रंजन ने अब चिकित्सा सेवा का दायरा अस्पताल और क्लिनिक से आगे बढ़ाते हुए गांवों तक पहुंचा दिया है।

बरौली निवासी डा. रंजन शहर के कालेज रोड में निजी क्लिनिक चलाने के साथ ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को सीपीआर की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

उनका उद्देश्य है कि आपात स्थिति में डाक्टर या एंबुलेंस के पहुंचने से पहले कोई व्यक्ति किसी की जान बचाने की शुरुआती कोशिश कर सके।

एम्स की नौकरी से गांव की चौपाल तक पहुंची जिंदगी बचाने की मुहिम

अचानक हृदय रुकने या सांस बंद होने जैसी आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। ऐसे समय में आसपास मौजूद व्यक्ति सही तरीके से सीपीआर दे सके तो मरीज को अस्पताल पहुंचने तक जीवनरक्षक सहायता मिल सकती है।

इसी जरूरत को समझते हुए डा. अभिषेक रंजन ने सीपीआर प्रशिक्षण को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। वह अलग-अलग गांवों और संस्थानों में युवाओं, ग्रामीणों और स्वास्थ्यकर्मियों को इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि जीवन बचाने की यह जानकारी सिर्फ चिकित्सकों तक सीमित न रहे।

अफसरों से लेकर आशा-ममता तक को सिखाई आपात मदद की तकनीक

जिला प्रशासन के सहयोग से डा. रंजन सरकारी पदाधिकारी और कर्मचारियों को भी सीपीआर का प्रशिक्षण दे चुके हैं। जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में आशा कार्यकर्ताओं और ममता को भी आपात स्थिति में मरीज को प्राथमिक सहायता देने के तरीके बताए गए हैं।

प्रशिक्षण के दौरान मरीज की स्थिति पहचानने, सीपीआर की प्रक्रिया और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के बारे में जानकारी दी जाती है।

इससे स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी आपातकालीन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने की कोशिश हो रही है।

गांव के युवा बनेंगे जिंदगी बचाने की पहली कड़ी

डा. रंजन का मानना है कि किसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि ग्रामीणों और युवाओं को बुनियादी जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी हो तो वे उस समय मरीज की मदद कर सकते हैं।

इसी सोच के साथ वह अधिक से अधिक लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण देने में जुटे हैं। उनका प्रयास है कि गांवों में भी ऐसे लोग तैयार हों जो जरूरत पड़ने पर शुरुआती मदद कर सकें।

नौकरी छोड़ी, सेवा का दायरा बढ़ाया

एम्स की नौकरी छोड़कर गृह जिले में लौटना और निजी चिकित्सा सेवा के साथ समाज को जीवनरक्षक तकनीक सिखाना डा. अभिषेक रंजन की सेवा यात्रा का अलग अध्याय है।

क्लिनिक में मरीजों का इलाज करने के साथ वह गांवों में जाकर लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। पदाधिकारी-कर्मियों से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों और ग्रामीण युवाओं तक को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश जारी है।

उनका लक्ष्य है कि सीपीआर की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, ताकि किसी आपात स्थिति में मदद मिलने तक जिंदगी बचाने की कोशिश की जा सके।