गोपालगंज ADM राजेश्वरी पाण्डेय पर SVU का शिकंजा, सरकारी गाड़ियों के डीजल खर्च जांच की चर्चा भी गर्म
गोपालगंज की एडीएम राजेश्वरी पाण्डेय के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष निगरानी इकाई ने छापेमारी की।

टोपी पहने एडीएम राजेश्वरी पाण्डेय। (जागरण)
HighLights
एडीएम राजेश्वरी पाण्डेय के ठिकानों पर SVU की छापेमारी।
आय से अधिक संपत्ति मामले में हुई यह बड़ी कार्रवाई।
पटना, सासाराम से मिले संपत्ति के अहम दस्तावेज।
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। जिले की अपर जिला दंडाधिकारी (एडीएम) राजेश्वरी पाण्डेय के ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की छापेमारी के बाद शनिवार को प्रशासनिक महकमे में चर्चाओं का दौर जारी रहा।
शुक्रवार को गोपालगंज स्थित उनके सरकारी आवास के अलावा पटना और सासाराम में भी तलाशी ली गई थी। सूत्रों के अनुसार, पटना और सासाराम स्थित आवासों से जमीन और फ्लैट से जुड़े 12 से अधिक दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है।
बैंक खाते में करीब 1.50 करोड़ रुपये होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, संपत्तियों और बैंक में जमा राशि का विस्तृत ब्योरा आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
जांच एजेंसी दस्तावेजों और अन्य संपत्तियों की पड़ताल कर रही है, ताकि ज्ञात आय के स्रोतों के अनुरूप संपत्ति का आकलन किया जा सके।
ब्लॉक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास से भी मिले कागजात
गोपालगंज शहर की ब्लॉक कॉलोनी स्थित एडीएम के सरकारी आवास पर एसवीयू की टीम ने शुक्रवार देर रात तक तलाशी ली।
इस दौरान टीम जमीन से जुड़े चार दस्तावेज अपने साथ ले गई। छापेमारी का उद्देश्य संपत्ति के कागजात, वित्तीय लेनदेन और आय के स्रोतों की जांच करना बताया गया है।
पूर्व डीएम के कार्यकाल में भी हुई थी जांच
एडीएम राजेश्वरी पाण्डेय से जुड़ा एक पुराना मामला भी शनिवार को चर्चा में रहा। तत्कालीन जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा के कार्यकाल में सरकारी गाड़ियों में डीजल की खपत की जांच के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी।
बताया जाता है कि उस समय एडीएम के स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली गाड़ियों के डीजल खर्च की जांच हुई थी। हालांकि, जांच के निष्कर्ष और मौजूदा छापेमारी से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अन्य ठिकानों पर भी जांच जारी
एसवीयू अब छापेमारी में मिले कागजात और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही संपत्ति के वास्तविक मूल्य और आय के स्रोतों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा बनी हुई है।
