गया। प्रखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित गुनेरी गाव सदियों से भगवान बुद्ध के आगमन का गवाह रहा है। ज्ञान प्राप्ति के बाद पहली रात उन्होंने यहीं विश्राम किया था। इस गांव में भगवान बुद्ध की 106 छोटी-बड़ी प्रतिमाएं हैं, जो देखरेख के अभाव में उपेक्षित हैं।

ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ जाने के दौरान पहली रात यहीं गुनेरी के तत्कालीन राजा महेन्द्र पाल के घर पर विश्राम किया था। अगली सुबह गुनेरी गाव के बाहर एक तालाब में स्नान कर भगवान भोले शकर की पूजा अर्चना की थी। इसके बाद यहा से सारनाथ के लिए प्रस्थान कर गए थे।

ये सभी धरोहरें आज भी विद्यमान हैं, लेकिन उपेक्षित हैं। 2002 में गुरुआ के तत्कालीन विधायक रहे पूर्व मंत्री शकील अहमद खा ने पर्यटकों की सुविधा के लिए करीब 30 लाख रुपये की लागत से मंदिर का सुंदरीकरण व ध्यान केंद्र के निर्माण कार्य का शिलान्यास कराया था। तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री माधव लाल सिंह व बिहार सरकार के मंत्री सुरेश पासवान भी इस समारोह के साक्षी थे। लेकिन वह कार्य आज तक अधूरा ही रहा।

22 फरवरी 2017 को गुनेरी स्थित बौद्ध मंदिर का निरीक्षण मगध क्षेत्र के तत्कालीन डीआइजी सुनील कुमार, तत्कालीन जिला पदाधिकारी कुमार रवि व अन्य अधिकारियों ने भी किया था। इस ऐतिहासिक धरोहर व पर्यटन स्थल के विकास का भरोसा लोगों को दिलाया था, लेकिन ग्रामीणों की अपेक्षा आज तक पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थान तक पर्यटकों व बौद्ध श्रद्धालुओं के आने के लिए जीटी रोड पर चंडीस्थान के पास मुख्य द्वार बनाने की भी कई बार माग की गई है, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई।

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Posted By: Jagran