गया का तिलकुट, मिथिला का मखाना और सिलाव खाजा; राष्ट्रपति तो लाम के भोज में दिखी भारत की स्वाद विविधता
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के भारत दौरे पर बिहार की पारंपरिक मिठाइयों और कृषि उत्पादों को विशेष महत्व दिया ...और पढ़ें

महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में पूजा करते वियतनाम के राष्ट्रपति।
HighLights
वियतनाम राष्ट्रपति तो लाम ने बोधगया में महाबोधि मंदिर का दौरा किया।
उन्हें गया का तिलकुट, अनरसा और लाई भेंट किए गए।
राजकीय भोज में बिहार के जीआई-टैग उत्पादों को परोसा गया।
जागरण संवाददाता, गयाजी। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक नगरी बोधगया की आध्यात्मिक विरासत और बिहार के पारंपरिक स्वाद की गूंज अब वियतनाम तक पहुंच गई है।
भारत दौरे पर आए वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के सम्मान में आयोजित राजकीय कार्यक्रमों और भोज में बिहार की प्रसिद्ध मिठाइयों एवं कृषि उत्पादों को खास स्थान दिया गया।
राष्ट्रपति तो लाम एक मई को तीन दिवसीय भारत दौरे पर बोधगया पहुंचे थे। उन्होंने महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की और वियतनाम मोनास्ट्री का भी भ्रमण किया। उनके साथ 90 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद था।
राष्ट्रपति को भेंट किए गए गया के पारंपरिक उत्पाद
बोधगया से दिल्ली रवाना होने से पहले गया एयरपोर्ट पर बिहार सरकार की ओर से राष्ट्रपति तो लाम को गया का प्रसिद्ध तिलकुट, अनरसा और लाई भेंट स्वरूप प्रदान किया गया।
इसके साथ ही विष्णुपद मंदिर के पवित्र विष्णु चरण चिह्न और महाबोधि मंदिर परिसर स्थित पवित्र बोधिवृक्ष का पत्ता स्मृति चिह्न के रूप में भेंट किया गया।
गया का तिलकुट अपनी पतली और कुरकुरी परतों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, जबकि गुड़ और भीगे चावल के आटे से बनने वाला अनरसा अपनी पारंपरिक मिठास और सांस्कृतिक पहचान के कारण खास माना जाता है।
राजकीय भोज में दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता
राष्ट्रपति तो लाम के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज में देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक खाद्य सामग्री परोसी गई। इसमें बिहार और महाराष्ट्र के कई प्रसिद्ध उत्पाद शामिल रहे।
भोज में गया का अनरसा, मिथिला का मखाना, हाजीपुर का मालभोग केला, नालंदा के सिलाव का प्रसिद्ध खाजा और महाराष्ट्र के रत्नागिरी का अल्फांसो (हापुस) आम शामिल थे।
जीआई टैग वाले उत्पादों को मिला खास स्थान
सिलाव खाजा अपनी कई पतली परतों और हल्के कुरकुरे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। मैदा, चीनी और घी से पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाली इस मिठाई को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त है।
मिथिला का मखाना भी पोषण गुणों के कारण देश-विदेश में पहचान बना चुका है। वहीं हाजीपुर का मालभोग केला अपनी प्राकृतिक मिठास और खुशबू के लिए जाना जाता है।
रत्नागिरी का अल्फांसो आम अपने गहरे स्वाद, सुगंध और सुनहरे रंग के कारण विश्व प्रसिद्ध है।
मिलेट उत्पाद भी बने आकर्षण का केंद्र
राजकीय भोज में महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित मोटे अनाज (मिलेट) से बने मिलेट बार्स भी शामिल किए गए। फाइबर, प्रोटीन और खनिजों से भरपूर ये उत्पाद स्वास्थ्य के लिहाज से लाभकारी माने जाते हैं।
