गया : नगर निगम में पिछले एक पखवारे से नगर आयुक्त का पद खाली है। यहां वित्त से जुड़े पदाधिकारी भी नहीं हैं। ऐसे में शहरी क्षेत्र में साफ-सफाई कार्य में लगे वाहनों के सामने डीजल एवं पेट्रोल की किल्लत झेलनी पड़ सकती है। प्रत्येक दिन डीजल एवं पेट्रोल में करीब डेढ़ लाख रुपये से अधिक खर्च होता है। एक पखवारे में पेट्रोल पंप संचालक को 25 लाख रुपये बकाया हो गया है। ऐसे में पेट्रोल पंप संचालक इंधन देने में आनाकानी करने लगे है। अगर इंधन देना बंद कर देंगे तो सफाई कार्य में बाधा आ सकता है। सरकार द्वारा किसी भी पदाधिकारी को वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया है। जिससे कारण राशि की निकासी बैंक से नहीं सकता है। पूर्व नगर आयुक्त सावन कुमार के तबादला 30 दिसंबर को हो गया था। उसके बाद दूसरे नगर आयुक्त की पदस्थापना नगर निगम में नहीं हुआ है। दो-चार दिनों में नगर आयुक्त के पदस्थापना नहीं होने से साफ-सफाई के साथ कई विकास संबंधित कार्यो पर असर दिखने लगेगा। ---------------------------------------

पिछड़ सकता है स्वच्छता रैंकिग में

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नगर आयुक्त के पद खाली रहने से शहर स्वच्छता रैंकिग में पिछड़ सकता है। क्योंकि सबसे अधिक साफ-सफाई व्यवस्था पर असर पड़ेगा। सफाई कार्य में प्रत्येक दिन करीब 200 वाहन लगाए जाते है। ऐसे में वाहनों में इंधन की समस्या हो सकती है। वाहन नहीं चलने से सफाई व्यवस्था चरमरा सकता है। वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर इसी महीने दिल्ली से टीम आने वाली है। अगर शहर की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं रहा तो स्वच्छता रैंकिग में शहर पिछड़ सकता है।

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गणतंत्र दिवस पर भी निगमकर्मियों को वेतन नहीं मिलने की उम्मीद

निगमकर्मियों को गणतंत्र दिवस पर भी वेतन नहीं मिलने का उम्मीद है। नगर आयुक्त के बिना वेतन की राशि निगमकर्मियों के खाते में निर्गत नहीं हो सकता है। राशि निर्गत को लेकर नगर आयुक्त का हस्ताक्षर जरूरी है। ऐसे भी निगमकर्मियों को दो माह का वेतन बकाया है। गणतंत्र दिवस पर मिलने का पूरा उम्मीद था। अचानक नगर आयुक्त के तबादला से वेतन मिलने का उम्मीद समाप्त हो गया है।

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सैरात बंदोबस्ती का कार्यो में होगी परेशानी

नगर आयुक्त का पद खाली रहने से सैरात बंदोबस्ती काम में भी असर पड़ रहा है। क्योंकि बंदोबस्ती को लेकर कार्य इसी माह से प्रारंभ हो जाता है। जिससे नगर निगम का अच्छी आय होती है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट तैयार करने में भी परेशानी हो रही है। साथ ही कई विकास संबंधित योजनाओं पर विराम लग गया है।

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नगर आयुक्त के पद एक पखवारे से अधिक दिनों से खाली है। जिसका सूचना जिलाधिकारी एवं नगर विकास एवं आवास विभाग को दिया गया है। सूचना देने के बाद किसी भी पदाधिकारी को नियुक्ति नहीं किया है। ऐसे में कई विकास संबंधित कार्यो में बाधा आ रही है।

वीरेंद्र कुमार, मेयर

Edited By: Jagran