नवादा, संवाद सहयोगी। जिला प्रशासन से न्याय नहीं मिला तो आखिरकार उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामला जिले के उग्रवाद प्रभावित सिरदला प्रखंड क्षेत्र के घघट पंचायत की कुसुम्भातरी गांव के जनवितरण दुकानदार उमेश प्रसाद का है।

क्या है मामला

वर्ष 2017 में कुसुम्भातरी गांव के उमेश प्रसाद पिता मेघन प्रसाद के नाम पीडीएस की अनुज्ञप्ति संख्या 185/17 जारी की गयी। आरोप है कि एक ही व्यक्ति का दो नाम है जबकि जन्मतिथि भी अलग-अलग है।

क्या है आरोप

गांव के ही सुनील कुमार पिता रामस्वरूप यादव का आरोप है कि उमेश प्रसाद पिता मेघन प्रसाद व भुवनेश्वर प्रसाद पिता मेघन प्रसाद नामक एक ही व्यक्ति है। उन्होंने पीडीएस दुकान के लिये दिये आवेदन में अपनी जन्मतिथि 01/10/56 दर्शायी है। सिरदला मध्य विद्यालय में नामांकन पुस्तिका में इनकी जन्मतिथि 25/12/52 हैं। जहां इन्होंने 61 से लेकर 64 तक शिक्षा ग्रहण किया है। जबकि मैट्रिक इन्होंने 69 में उत्तीर्ण किया है।

कैसे हुआ  पर्दाफाश

पोल तब खुली जब इनके विरुद्ध सिरदला थाना कांड संख्या 137/20 दर्ज हुआ। उक्त कांड में इन्होंने अपना नाम भुवनेश्वर प्रसाद पिता मेघन प्रसाद दर्ज कराया। ताकि इनकी दुकान पर किसी प्रकार की आंच न आ सके।

प्रमाण के साथ दुकान रद करने की लगाई गुहार

उक्त मामले में सुनील कुमार ने उमेश प्रसाद की अनुज्ञप्ति को रद्द करने की गुहार रजौली एसडीओ से लेकर समाहर्ता तक लगायी। यहां तक कि राज्य सूचना आयोग तक का सहारा लिया। इसके लिए विद्यालय से लेकर थाना तक का दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, बावजूद जिला प्रशासन ने दुकान निलंबित कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।

खटखटाया उच्च न्यायालय का दरवाजा

परेशान सुनील कुमार ने अब तमाम दस्तावेजों के आधार पर दुकान रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

 

Edited By: Sumita Jaiswal