गया । जिले में मलेरिया मच्छरों के खात्मे के लिए 23 जुलाई तक दवा का छिड़काव किया जाएगा। इसके लिए मलेरिया विभाग ने चार टीमें बनाई हैं। हर टीम में छह कर्मी काम करेंगे। विभाग द्वारा जिले के 50 मलेरिया मच्छर प्रभावित गांवों में डीडीटी दवा का छिड़काव कराया जाएगा। नगर प्रखंड के जगन्नाथपुर से यह अभियान शुरू होगा। साथ ही परैया के एक गांव में भी दवा छिड़काव होगा। दवा छिड़काव दल के कर्मी लोगों के घरों पर जाकर दवा छिड़कने (स्प्रे) का काम करेंगे। साथ ही लोगों को मलेरिया के खतरनाक मच्छरों से बचाव के लिए जागरूक भी करेंगे।

जिले के नगर प्रखंड, टिकारी व परैया प्रखंड मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में शामिल है। सोमवार को जयप्रकाश नारायण अस्पताल में जिला वैक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एमई हक ने दवा छिड़काव दल के कर्मियों को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने किस तरह से दवा छिड़कनी है, लोगों को कैसे समझाना है इन सबके बारे में जानकारी दी। साथ ही हर दिन दवा छिड़काव की रिपोर्टिग भी करने को कहा।

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मानसून से पूर्व होता

है दवा छिड़काव

जिला वैक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एमई हक ने बताया कि जून महीना मलेरिया माह के रूप में पूर्व से घोषित है। मलेरिया विभाग इस पूरे महीने मलेरिया माह मनाता है। गौरतलब है कि जिले में पिछले साल मलेरिया के 68 मरीज सामने आए थे। इस साल अब तक एक भी मरीज नहीं चिह्नित हुए हैं।

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वाइभेक्स से ज्यादा खतरनाक

है फैल्सीफेरम मलेरिया

मादा एनोफ्लीज मच्छर के काटने से मलेरिया रोग होता है। यह दो तरह के होते हैं। वाइवेक्स और फैल्सीफेरम। जिला वैक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. एमई हक ने बताया कि फैल्सीफेरम ज्यादा खतरनाक है। इसमें संक्रमित व्यक्ति की जान तक जा सकती है। समय रहते इलाज जरूरी है। गर्भवती महिला को यदि फैल्सीफेरम हो जाए तो गर्भपात भी होने का डर रहता है।

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मलेरिया के लक्षण

-तेज बुखार आना

-ठंड लगना

-मस्तिष्क ज्वर की स्थिति

-वजन घटना

-ब्लड प्लेटलेट्स गिरना

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उपचार

चिकित्सक की सलाह पर मलेरिया की जांच कराना, बीमारी की पुष्टि होने पर नियमित रूप से दवा सेवन करना

Posted By: Jagran

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