औरंगाबाद। किसानों को इस वर्ष भी उत्तर कोयल नहर से पानी नहीं मिलेगा। देव, मदनपुर, औरंगाबाद एवं रफीगंज प्रखंड के किसानों की आंखें पानी के लिए पथरा गई पर कुछ नहीं हुआ। बताते चलें कि 1972 में 1.25 लाख हेक्टेयर जमीन की सिचाई के लिए उत्तर कोयल परियोजना का खाका तैयार हुआ था।

तब परियोजना पर मात्र 30 करोड़ रुपये खर्च होता। वर्तमान में इस परियोजना पर 900 करोड़ रुपये से अधिक व्यय हुआ है। परंतु परियोजना अधूरी पड़ी है। इतने वर्षों में न जाने कितनी पीढि़यां गुजर गई लेकिन सत्ता और व्यवस्था के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। परियोजना की गति पकड़ने के आसार बढ़े हैं परंतु धरातल पर काम दिखाई नहीं दे रहा है। झारखंड में कुटकु डैम का निर्माण होना है परंतु अब तक नहीं हो सका है। जब तक डैम में गेट नहीं लगेगा नहर से किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिलेगी। कुटकु डैम में 1170 मिलियन घनमीटर जल भंडारण की होगा। विभाग के अभियंता बताते हैं कि 1972 में परियोजना की प्राक्कलत राशि 30 करोड़ थी जो 1974 में 58 करोड़, 1977 में 114 करोड़, 1998 में 836 करोड़ एवं 2006 में 1289 करोड़ जा पहुंची। परियोजना पर अब तक 900 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। 6 मार्च 2017 के एडवाइजरी कमेटी की बैठक में कार्य को पूरा करने के लिए 900 करोड़ खर्च करने के बाद 1622 करोड़ की मंजूरी दी गई। करोड़ों रुपये खर्च हो जाने के बाद भी किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंच सका। परियोजना के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास 5 जनवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया गया। वन विभाग द्वारा एनओसी नहीं मिलने के कारण परियोजना का कार्य ठप पड़ा है। मदनपुर प्रखंड के जमुनिया गांव के किसान मुरारिक यादव, सिजुआही के राजेश यादव, शिवनारायण यादव, अमरजीत कुमार, चिल्हमी के आशीष यादव, शिवदत यादव एवं रतनुआं के रामप्रवेश यादव ने बताया कि पानी की आस में आंखें पथरा गई है। वर्षों से उत्तर कोयल नहर में पानी का इंतजार है। पानी के को लेकर हर वर्ष सुखाड़ का सामना करना पड़ता है।

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