सूर्यपुरा (रोहतास), संवाद सूत्र। प्रखंड क्षेत्र में  पेयजल संकट गहराने लगा है। भूगर्भ जल स्तर के खिसकने से कई घरों में चापाकल पानी देना बंद कर दिया है। नतीजा लोगों को दूसरे गांवों या डीप बोरिंग वाले घरों से पानी लाना पड रहा है। कई लोग तो यह सोचकर चिंतिंत है कि निकट भविष्य मे सूर्य का प्रकोप इसी तरह रहा और लोग जल संचय के प्रति सचेत नही हुए तो पीने का पानी का संकट और बढ सकता है। 

हर माेहल्‍ले में कुएं के जल का होता था उपयोग

बारून गांव के 85 वर्षीय रामनाथ सिंह , चंद्रमा शर्मा आदि ने बताया कि हम लोगों के समय मे हर मुहल्ले मे कुआं हुआ करता था जहां से सभी लोग सामूहिक रूप से पीने के लिए पानी घर में लाया करते थे, जिससे गांव मे सौहार्दता तो कायम रहती ही थी, साथ ही पीने की पानी आसानी से उपल्ब्ध हो जाता था। पानी बर्बाद नही होता था। नहर के किनारे बने चाट आहर, ताल तलैया मे भी पानी भरा रहता था , जिससे पशु-पक्षियों आदि को भी आसानी से पानी मिल जाया करता था। परंतु बदलते परिवेश में लोगों को जहा आधुनिक सुविधाए प्राप्त हुई वही लोग जल संचय के प्रति काफी उदासीन भी हुए है। जल की बर्बादी तो होती है लेकिन उसका संचय नही होने से जल संकट गहराने लगा है।

अपनी गलती का स्‍वयं भुगत रहे खामियाजा

कई बुजुर्गो ने कहा कि लोग अपने द्धारा ही की गई गलती का शिकार स्वयं  हो रहे है। चाट, आहर, पोखर आदि अतिक्रमण के चपेट मे होने से सिंचाई व्यवस्था भी चरमराने लगी है। जबकि सूर्यपुरा बडा तालाब, रानी का पोखरा,छोटका पोखरा सहित आहरों मे सालो भर पानी भरा पडा रहता था, पर प्रशासन व लोगों की उदासीन रवैया के कारण आज सभी सुखा पडा है। काव नदी, ठोरा नदी की धारा कभी रूकती नही थी, लेकिन भूगर्भ जल स्तर के खिसकने तथा भीषण गर्मी के प्रकोप से सब शिथिल सा पड़ने लगा है। नतीजा मवेशियों को तपती दोपहरी मे पानी की तलाश मे कोसों दूर जाना पडता है। 

सूर्यपुरा के अशोक सिंह, विजय सिंह ने बताया कि इस मामले मे प्रशासन को सख्त  होना होगा। अतिक्रमण की चपेट मे पडे आहर चाट आदि की जल्द से जल्द खुदाई करा जल संचय के प्रति जागरूक होना होगा। कल्याणी गांव के विद्या नंद  पांडेय ने बताया कि कई वार्डो में नल -जल का पानी नही मिला। वही जल मीनार का समुचित लाभ लोगों को नही मिल रहा है। अधिकांश नल टूटे पडे है  जहां पानी की बर्बादी हो रही है। 

55 कुएं के जीर्णोद्धार का लक्ष्‍य

कनीय अभियंता मनजीत कुमार ने बताया की 55 कुओं का जीर्णोद्धार करने का लक्ष्य है।  सूर्यपुरा का सर्वे हो गया है और स्टीमेट भी बन गया है।परंतु कार्य कहीं नहीं हो रहा है। प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि कुओं के जीर्णोद्धार के लिए सर्वे हुआ है। प्रखंड में 117 कुएं हैं। इसमें 55 सार्वजनिक और 62 निजी कुएं शामिल हैं। सार्वजनिक कुओं की सूची पीएचईडी को सौंपी गई है। क्षेत्र में 405 आहर व पईन है। जिस में 238 आहरों पर कार्य मनरेगा से कराई जाएगी।

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