गया । भारतीय संस्कृति में अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा निवेदन, पूजन, हवन एव तर्पण करने का पुनीत समय पितृपक्ष के नाम से जाना जाता है। इसी कारण से पितृपक्ष में प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में देश-विदेश से तीर्थयात्री आते हैं। पितृपक्ष के दूसरे दिन शनिवार को रामशिला एवं कागवेदी पर कर्मकांड को लेकर पिंडदानियों को भीड़ उमड़ी पड़ी। प्रेतशिला में कर्मकांड संपन्न होने के बाद पिंडदानी रामशिला और कागवलि वेदी पहुंचने लगे। जहां रामकुंड सरोवर के पवित्र जल से तर्पण कर कर्मकांड की विधि प्रारंभ किया। वैदिक मंत्रोंच्चारण के साथ गयपाल पुरोहितों द्वारा कार्यकांड की विधि कराया जा रहा है। दोपहर में पूरा पिंडवेदी परिसर पिंडदानियों से पट गया है। पिंडवेदी के अलावा रामशिला तलहटी में स्थित श्रीगणेश मंदिर के प्रांगण में बैठक कर्मकांड कर रहे थे। पिंडदानी कर्मकांड का सामग्री के साथ पिंडवेदी पर पहुंच रहे है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम रामकुंड सरोवर में स्नान कर पिंडदान किया है। तभी से रामशिला में पिंडदान होता है। यह पिंडदान करने से पितरों को मुक्ति मिलता है। वहीं पिंडदानियों ने कागवलि पिंडवेदी में कर्मकांड किया। मान्यता है कि यहां कर्मकांड करने से पितृ काग के रूप में आकर पिंड को ग्रहण करते है। उक्त मान्यता को लेकर कर्मकांड पिंडदानी करते हैं।

Posted By: Jagran

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